बुधवार, ७ अक्तूबर २००९

ईश्वर हमारे साथ है


ईश्वर हमेशा हमारा ख्याल रखता है

वह हमारे अन्दर ही है

हमें अच्छे बुरे की पहचान कराता है

हम ईश्वर के साथ खुश रहते हैं

वही हमारा पालक और रक्षक है

वही राम है, वाही खुदा है वाही जीसस है.
अपने को आज ही ईश्वर को सौपं दे

क्योंकि

वह हमेशा हमारे साथ है .......


प्रस्तुति - जीके इंडियन



पहाडों में ड्राइविंग का आनंद

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पहाडों में ड्राइविंग का अपना आनंद होता है....
सूनी सूनी सड़कें ......
शान्ति को चीरती हुई पक्षियों की सुरीली आवाज ...
दूर दूर तक सड़क से दूर पगडंडियों पर चलते हुए लोग...
उम्र से लम्बी सड़कें ....
जिन्दगी में आने वाले घुमाओं की तरह सड़कें
और रेडियो पर बजता मस्त संगीत ....
मजा जाता सफर का जब ये सबकुछ हो तो ...
आप भी आनंद लीजिये .........

प्रस्तुति - जीके इंडियन

गोलुदेव का मन्दिर - घोडाखाल (नैनीताल)

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गोलू देव मन्दिर, घोडाखाल
( मेरी उत्तरांचल यात्रा अप्रैल ०९)

गोलू देवता उत्तराखंड के न्याय के देवता हैं। जिस किसी को भी कहीं से न्याय नही मिलता वह गोलू देवता की शरण में आता है। यहाँ के लोगों की यह मान्यता है की गोलू देवता सफल न्याय करते हैं और आज तक कोई भी उनके मन्दिर से निरास नहीं गया है।
दूर रहने वाले लोग जो मन्दिर तक नही आ सकते वो लोग गोलू देवता के मन्दिर में चिट्ठी भेजते हैं और न्याय हो जाने पर वहां घंटी चढाते हैं। जो लोग आ नहीं सकते वे दूर से ही गोलू देवता को याद कर लेते हैं।

गोलू देवता के मन्दिर तो पुरे उत्तराँचल में हैं लेकिन नैनीताल के पास घोडाखाल और अल्मोरा के पास चितई के गोलू मन्दिर पुरे उत्तराँचल में प्रसिद्ध हैं।

जय गोलुदेव ... सबकी रक्षा करें .............



प्रस्तुति - जीके इंडियन -

रेखा चित्र - पेन द्वारा

1.समय - समय जो कभी लौट के नही आताआओ समय का उपयोग करें ......।



२. जनाजा देख कर दिल बोला - सुब कुछ तो यहीं छोड़ कर जाना है




३...किताबें कभी भी साथ नहीं छोड़ती । इसलिए किताबों से प्यार करो ......




४... पति पत्नी - साथ रहें तो स्वर्ग अथवा नर्क




५....भारतीय मुस्लिम नारी




६.॥ प्रथम पूजनीय श्री गणेश जी महाराज




७... बुढापा - जीवन के अन्तिम पड़ाव की यात्रा की शुरुवात




८.॥ भारतीय हिंदू नारी - साड़ी में



९.......मुझे सभी पुराणी चीजें पसंद हैं जैसे पुराणी वीने, पुराणी पुस्तकें और पुराने दोस्त .




१०.....पिता पुत्र - पुराने और नए का संगम




११.॥ बुढापा - इश्वर भजन का सर्वोतम समय ( जब इश्वर याद आने लगता है )




१२ सोच - सोच से ही ज्ञान बढ़ता है अतः दूर की सोचो .......



१३. कभी कभी आइना आपका मुह भी चिढाता है परन्तु आइना झूट नही बोलता



१४. जीवन मोमबत्ती की तरह है... चीरे धीरे जलती है और एक दिन ख़त्म हो जाती हैलेकिन दुनिया के अंधेरे को दूर करके की वह ख़त्म होती है..... जीवन ज्योति बनी ....



१५. आराम बढ़ी चीज में मुह धक् के सोइए - फिर तरोताजा हो जाए




१६. जन्म के साथ ही दौड़ शुरू हो जाती है ... आगे बढ़ने की दौड़ .... धन कमाने की दौड़ .... दुसरे को नीचा दिखने की दौड़ ..... और यह दौड़ चलती जाती है ....... मरने दम तक................

चित्रकार - जीके इंडियन

मंगलवार, ६ अक्तूबर २००९

Some Funny Applications in English

Some examples of the Leave Applications :


leave for selling land in village
"Since I have to go to my village to sell my land along with my wife , please sanction me one-week leave."


For son's mundan
"as I want to shave my son's head , please leave me for two days.."

for daughter
's wedding:
"as I am marrying my daughter , please grant a week's leave.."

For attending funeral of mother in law
"As my mother-in-law has expired and I am only one responsible for it , please grant me 10 days leave."

for casual leave
"Since I've to go to the cremation ground at 10 o-clock and I may not return , please grant me half day casual leave"

for sickness
"I am suffering from fever , please declare one-day holiday."

for sickness by school boy
1. "As I am studying in this school I am suffering from headache. I request you to leave me today"

2. "As my headache is paining , please grant me leave for the day."

Covering note:
"I am enclosed herewith..."
Another one:
"Dear Sir: with reference to the above , please refer to my below..."

Actual letter written for application of leave:
"My wife is suffering from sickness and as I am her only husband at home I may be granted leave".

Letter writing:-
"I am well here and hope you are also in the same well."

A candidate's job application:
"This has reference to your advertisement calling for a ' Typist and an Accountant - Male or Female'... As I am both(!! )for the past several years and I can handle both with good experience , I am applying for the post.


चुटकले

कुछ मजेदार और महान वाक्य

Wife: Darling today is our anniversary, what should we do?
Husband: Let us stand in silence for 2 minutes।
************
It's funny when people discuss Love Marriage vs Arranged।
It's like asking someone, if suicide is better or being murdered।

**************

Why do couples hold hands during their wedding?
It's a formalityjust like two boxers shaking hands before the fight begins!

*************
Dr: Get married
Man: Will it help?
Dr: No, but then the thought of long life will never come.


*********
There is only one perfect child in the world and every mother has it।
There is only one perfect wife in the world and every neighbor has it!

***********

Having one child makes you a parent; having two you are a referee।

*************
Marriage is a relationship in which one person is always right and the other is the husband।
I believe we should all pay our tax with a smile। I tried - but they wanted cash।

*************

Don't marry the person you want to live with, marry the one you cannot live without, but whatever you do, you'll regret it later।

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You can't buy love, but you pay heavily for it।

*************
My wife and I always compromise। I admit I'm wrong and she agrees with me.

************
Those who can't laugh at themselves leave the job to others।
शराबी और शराब
.......... एक शराबी आधे घण्टे से शराब का प्याला सामने रख कर उसे घूरे जा रहा था । उसी बार में मस्तमौला बंता भी बैठा हुआ था। उसे मजाक सूझा। वह उठा और उसने शराबी के सामने रखा हुआ जाम एक ही सांस में खाली कर दिया। यह देखकर शराबी रोने लगा।
बंता - रो मत यार ! तू काफी देर से चुपचाप बैठा हुआ था इसलिए मैंने तो मजाक किया था । चल मैं तेरे लिए दूसरा गिलास मंगा देता हूं .....
शराबी - मैं शराब के लिए नहीं रो रहा हूं। मैं तो अपनी किस्मत को रो रहा हूं। आज का दिन मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दिन है। आज मैं देर से ऑफिस पहुंचा तो बॉस ने नौकरी से निकाल दिया। बाहर आया तो देखा मेरी गाड़ी चोरी हो चुकी थी। किसी तरह घर पहुंचा तो पता चला कि मेरी बीबी मेरा सारा पैसा और सामान लेकर अपने प्रेमी के साथ चंपत हो चुकी थी। आखिर में मैं इस बार में आया और आत्महत्या करने की सोच ही रहा था कि तुम आ गए और मेरा जहर मिला शराब का गिलास पी गए।

.... एक बार दो नशेडी दिल्ली चले गए इंडिया गेट धोरे बैठ के उन ने सुल्फे के बीडी भर ली
कसूते लाल होए पाछे चालन लगे ऊपर ने देख्या एक बोला दुसरे ने माडा सा तले ने हो ले ना तो इंडिया गेट में सर भाड़ जागा! दोनुवा ने नाड़ बानगी कर ली ऊपर ने देख्या इंडिया गेट और नीचे दिखया थोड़े और टेढे हो गए !
ऊपर देख्या फेर न्यू ए!
न्यू करते करते कत्ति फौजिया की धाल कोहनिया पे आ लिए !
एक पुलिसिये ने देख्या रे यू के सांग है दिया एक के सर में लठ जिसके लगया बोल्या "मर गया रे !"
दूसरा बोला पहलम ए ना कहू था माडा सा तलाने ने मर ले

३.... एक शराबी आधी रात के बखत नशे में धुत्त सड़क पै चाल्या जावै था । सड़क के किनारे एक खंबे पै, जिस पै एक बल्ब जळै था, उस कै धोरै आ-कै रुक ग्या अर खंभे नै हाथ तैं खटखटावण लाग्या अर आवाज देण लाग्या - "खोलो, दरवाजा खोलो" ।

एक चौकीदार नै यो नजारा देख्या अर उसतैं मखौल करण की सोची । वो शराबी तैं बोल्या - "ओ भाई, हाड़ै घर में कोए कोनी, जा आगे-नै" ।

शराबी बोल्या "कोए क्यूकर कोनी, ऊपर देख - उपर चौबारे की लाइट बी जळण लाग रही सै ।


चुटकले

बुडिया जब जवान हो कर निकली
एक ग्रामीण पिता-पुत्र अपने नजदीकी शहर में शॉपिंग मॉल देखने गये। यूं तो वहां की हर चीज देखकर वे चकित थे परन्तु एक जगह एक खुलने और बन्द होने वाली दीवाल (लिफ्ट) देखकर वे विशेष रूप से प्रभावित हुये। उन्होंने ऐसी दीवाल पहले कभी नहीं देखी थी ।
जिस समय वे पिता पुत्र आंखे फाड़ फाड़ कर उस दीवाल को देख रहे थे उसी समय एक बूढ़ी औरत उस दीवाल के पास पहुंची और दीवाल पर लगा एक बटन दबाया। बटन दबाते ही दीवाल खुल गई और बूढ़ी औरत उस दीवाल के अन्दर चली गई । दीवाल फिर बन्द हो गई। थोड़ी देर बाद दीवाल अपने आप खुली और उसमें एक पच्चीस साल की खूबसूरत लड़की बाहर निकली।
पिता यह सब देखकर लगभग चिल्लाते हुये पुत्र से बोला - ''बेटा, जल्दी घर जा और अपनी मां को लेकर आ।''


स्वर्ग और नरक
तीन दोस्त मर गये और स्वर्ग में पहुंचे। पहले दोस्त को स्वर्ग की सबसे बदसूरत और भद्दी महिला के साथ रहने को कहा गया।
''क्यों ?'' - उसने सवाल किया।
''क्योंकि जब तुम नौ साल के थे तुमने एक चिड़िया को पत्थर से मारा था।'' - यमराज ने जवाब दिया।
ठीक यही दूसरे दोस्त के साथ भी हुआ। उसने भी पूछा कि उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है। यमराज ने उसे भी वही जवाब दिया कि जब वह नौ साल का था उसने एक चिड़िया को पत्थर से मारा था।
तीसरा दोस्त यह सुनकर खुश हुआ और बोला - ''चलो अच्छा है कि मैंने ऐसा कोई काम नहीं किया।'' उसे स्वर्ग की सबसे खूबसूरत महिला का साथ नसीब हुआ। बाकी दोनों दोस्तों ने पूछा - ''क्यों ?''
''क्योंकि जब वह महिला नौ साल की थी तब उसने एक चिड़िया को पत्थर से मारा था

इंटरव्यू
एक युवक नौकरी के लिये इंटरव्यू देने गया। इंटरव्यू की समाप्ति पर साक्षात्कारकर्ता ने उससे अंतिम सवाल पूछा - ''आप कितने वेतन की अपेक्षा रखते हैं ?'
युवक ने जवाब दिया - ''यही कोई पांच लाख रूपये सालाना के आसपास वेतन और उसी अनुसार भत्ते।'
साक्षात्कारकर्ता - ''अच्छा ये बताओ अगर तुम्हें दस लाख रूपये सालाना वेतन, करीब पांच लाख रूपये के आसपास भत्ते, पॉश कॉलोनी में एक बंगला, आने जाने के लिये एक होंडा सिटी और शहर से बाहर जाने पर मुफ्त हवाई यात्रा दी जाये तो तुम्हें मंजूर होगा।'
युवक - ''वाह क्या बात है ! कहीं आप मजाक तो नहीं कर रहे ?'
साक्षात्कारकर्ता - ''हां, लेकिन मजाक पहले तुमने शुरू किया था।'

बदचलन औरत
एक फिल्म अभिनेत्री 15 वें माले पर स्थित अपने आवास की बालकनी में रेलिंग पर खड़ी अपने प्रशंसकों का अभिवादन कर रही थी कि अचानक संतुलन खो बैठी और नीचे गिरने लगी। 12 वें माले की रेलिंग पर खड़े हुये एक नौजवान ने उसे अपनी बांहों में पकड़ लिया और पूछा - ''मुझसे शादी करोगी ?''''कभी नहीं''- अभिनेत्री ने नफरत से जवाब दिया । ''तो जाओ मरो!'' कहकर नौजवान ने उसे छोड़ दिया और वह फिर नीचे गिरने लगी। 11 वें माले पर खड़े एक अधेड़ ने हाथ बढ़ाकर उसे फिर पकड़ लिया और पूछा - ''मेरी प्रेमिका बनोगी ?''''हर्गिज नहीं!'' उसका इतना कहना था कि इस आदमी ने भी उसे छोड़ दिया। बेचारी अभिनेत्री को अब मौत साक्षात नजर आने लगी। वह ईश्वर से एक और मौका देने की प्रार्थना करने लगी कि तभी आठवें माले पर खड़े एक आदमी ने उसका हाथ पकड़ लिया। ''मैं तुमसे शादी कर लूंगी......! मैं तुम्हारी प्रेमिका बनूंगी.....! रखैल बनूंगी ! सब कुछ करूंगी!'' अभिनेत्री आदमी के कुछ बोलने के पहले ही भयातुर होकर कहने लगी। ''बदचलन औरत..... !'' आदमी ने कहा और हाथ छोड़ दिया।

जुरमाना

कॉलेज के पहले दिन, प्राचार्य महोदय ने छात्रों को कॉलेज के नियम समझाये - ''कोई भी लड़का लड़कियों के हॉस्टल में नहीं जा सकेगा। इसी प्रकार कोई भी लड़की लड़कों के हॉस्टल में नहीं जा सकती। इस नियम उल्लंघन करने पर पहली बार 100 रूपये जुर्माना भरना पड़ेगा। दूसरी बार पकड़े जाने पर 200 रूपये जुर्माना भरना पड़ेगा। इसी प्रकार यदि तीसरी बार पकड़े गये तो 1000 रूपये जुर्माना अदा करना होगा। किसी को इस बारे में कुछ पूछना है ? एक लड़के ने हाथ उठाया और पूछा , ''पूरे एक सत्र के लिये क्या देना होगा सर ?''

कवितायें

एक खुशी के लिए

एक खुशी के लिए
खोज और जीवन बिताना
या शांति की तलाश में
बेकार के सपने पालना......
खुशी और शान्ति तो भीतर है
फिर जगह जगह खोज क्यों ..............
" मन की किवडिया खोल प्रभु तेरे द्वारे खड़े..........

शिक्षक
एक साधारण शिक्षक
हमेश बताता है.

एक अच्छा शिक्षक
पूर्ण वर्णन करता है
लेकिन महान शिक्षक
हमेश प्रेरित करता है ..............

प्यार

जब आप प्यार करतें
तो सपनों में होते हो
लेकिन जो हकीकत में जीता है
वो प्यार नहीं कर सकता है..............


कुछ कवितायें

भूखा
दिन भर का भूखा
थकाहारा
रात को चाँद में भी
रोटी ढूंढता है ।

बिछुरे हुए

जिन्दगी के मेलों में बिछुरे
खुदा के घर मिलेंगे
यहाँ पहचान भी मुस्किल हो गई है
वहां गले मिलेंगे

मंगलवार, २९ सितम्बर २००९

मेहनती चींटी

चींटी को देखो .......


वह सरल, विरल, काली रेखा
तम के तागे सी जो हिल-डुल,
चलती लघु पद पल-पल मिल-जुल,
यह है पिपीलिका पाँति! देखो ना, किस भाँति
काम करती वह सतत, कन-कन कनके चुनती अविरत।

गाय चराती, धूप खिलाती,
बच्चों की निगरानी करती
लड़ती, अरि से तनिक न डरती,
दल के दल सेना संवारती,
घर-आँगन, जनपथ बुहारती।

चींटी है प्राणी सामाजिक,
वह श्रमजीवी, वह सुनागरिक।
देखा चींटी को?
उसके जी को?
भूरे बालों की सी कतरन,
छुपा नहीं उसका छोटापन,
वह समस्त पृथ्वी पर निर्भर
विचरण करती, श्रम में तन्मय
वह जीवन की तिनगी अक्षय।

वह भी क्या देही है, तिल-सी?
प्राणों की रिलमिल झिलमिल-सी।
दिनभर में वह मीलों चलती,
अथक कार्य से कभी न टलती।

साभार : श्री सुमित्रानंदन पंत जी

सोमवार, ७ सितम्बर २००९

प्राणायाम


प्राणाकर्षण प्राणायाम

(1) ''प्रातःकाल नित्य कर्म से निवृत्त होकर पूर्वाभिमुख पालथी मारकर बैठिए । दोनों हाथ घुटनों पर रखिए । मेरुदण्ड सीधा रखिए । नेत्र बन्द कर लीजिए । ध्यान कीजिए की अखिल आकाश में तेज और शक्ति से ओत-प्रोत प्राण-तत्त्व व्याप्त हो रहा है । गरम भाप के, सूर्य के प्रकाश में चमकते हुए जैसी बादलों शक्ल के प्राण का उफान हमारे चारों ओर उमड़ता चला आ रहा है और उस प्राण उफान के बीच हम निश्चित, शान्त-चित्त एवं प्रसन्न मुद्रा में बैठे हुए हैं ।''

(२) ''नासिका के दोनों छिद्रों से धीरे-धीरे साँस खींचना आरम्भ कीजिए और भावना कीजिए कि प्राण-तत्त्व के उफनते हुए बादलों को हम अपनी साँस द्वारा भीतर खींच रहे हैं । जिस प्रकार पक्षी अपने घोंसले में, साँप अपने बिल में प्रवेश करता है, उसी प्रकार यह अपने चारों ओर बिखरा हुआ प्राण-प्रवाह हमारी नासिका द्वारा साँस के साथ शरीर के भीतर प्रवेश करता है और मस्तिष्क, छाती, हृदय, पेट, आतों से लेकर समस्त अंगों में प्रवेश कर जाता है ।''

(३) ''जब साँस पूरी खींच जाय तो उसे भीतर रोकिये और भावना कीजिए कि-जो प्राण-तत्त्व खींचा गया है, उसे हमारी भीतरी अंग-प्रत्यंग सोख रहे हैं । जिस प्रकार मिट्टी पर पानी डाला जाय तो वह उसे सोख जाती है, उसी प्रकार अपने अंग सूखी मिट्टी के समान हैं और जलरूपी इस खींचे हुए प्राण को सोखकर अपने अन्दर सदा के लिए धारण कर रहे हैं । साथ ही प्राण-तत्त्व में सम्मिश्रित चैतन्य, तेज, बल, उत्साह, साहस, धैर्य, पराक्रम सरीखे अनेक तत्त्व हमारे अंग-प्रत्यंग में स्थिर हो रहे हैं ।''

(४) ''जितनी देर साँस आसानी से रोकी जा सके उतनी देर रोकने के बाद धीरे-धीरे साँस बाहर निकालिए, साथ ही भावना कीजिए कि प्राणवायु का सारतत्त्व हमारे अंग-प्रत्यंगों के द्वारा खींच लिए जाने के बाद अब वैसा ही निकम्मा वायु बाहर निकाला जा रहा है जैसा कि मक्खन निकाल लेने के बाद निस्सार दूध हटा दिया जाता है । शरीर और मन में जो विकार थे, वे सब इस निकलती हुई साँस के साथ घुल गये हैं और धुँए के समान अनेक दोषों को लेकर वह बाहर निकल रहे हैं ।''

(५) ''पूरी साँस बाहर निकल जाने के बाद कुछ देर साँस रोकिए, अर्थात् बिना साँस के रहिए और भावना कीजिए कि अन्दर के जो दोष बाहर निकाले गये थे उनको वापिस न लौटने देने की दृष्टि से दरवाजा बन्द कर दिया गया है और वे बहिष्कृत होकर हमसे बहुत दूर उड़े जा रहे हैं ।''


लोम-विलोम प्राणायाम

उपरोक्त प्राणाकर्षण प्राणायाम के बाद लोम-विलोम सूर्य-भेदन प्राणायाम का विधान है, जिसकी पद्धति निम्न प्रकार है ।
(1)किसी शान्त एकान्त स्थान में प्रातःकाल स्थिर चित्त होकर बैठिए । पूर्व की ओर मुख, पालथी मारकर सरल पद्मासन से बैठना, मेरुदण्ड सीधा, नेत्र अधुखुले घुटनों पर दोनों हाथ । यह प्राण- मुद्रा कहलाती है, इसी पर बैठना चाहिए ।

(2)बायें हाथ को मोड़कर तिरछा कीजिए । उसकी हथेली पर दाहिने हाथ की कोहनी रखिए । दाहिना हाथ ऊपर उठाइये । अँगूठा दाहिने नथुने पर और मध्यमा तथा अनामिका उँगलियाँ बायें नथुने पर रखिए ।

(3) बायें नासिका के छिद्र को मध्यमा (बीच की)और अनामिका (तीसरे नम्बर की) उँगली से बन्द की लीजिए । साँस फेफड़े तक ही सीमित न रहे, उसे नाभि तक ले जाना चाहिए और धीरे-धीरे इतनी वायु पेट में ले जानी चाहिए, जिससे वह पूरी तरह फूल जाय ।

(4) ध्यान कीजिए कि सूर्य की किरणों जैसा प्रवाह वायु में सम्मिलित होकर दाहिने नासिका छिद्र में अवस्थित पिंगला नाड़ी द्वारा अपने शरीर में प्रवेश कर रहा है और उसकी ऊष्मा अपने भीतरी अंग-प्रत्यंगों को तेजस्वी बना रही है ।
(5) साँस को कुछ देर भीतर रोकिये । दोनों नासिका छिद्र बन्द कर लीजिए और ध्यान कीजिए कि नाभिचक्र में प्राण-वायु द्वारा एकत्रित हुआ तेज नाभि चक्र में एकत्रित हो रहा है । नाभि स्थल में चीरकाल से प्रसुप्त पड़ा हुआ सूर्यचक्र इस आगत प्रकाशवान् प्राण-वायु से प्रभावित होकर चमकीला हो रहा है और उसकी दमक बढ़ती जा रही है ।
(6) दाहिने नासिका छिद्र को अँगूठे से बन्द कर लीजिए दायाँ खोल दीजिए । साँस को धीरे-धीरे से बायें नथुने से बाहर निकालिए और ध्यान कीजिए कि चक्र को सुषुप्त और धुंधला बनाये रहने वाले कल्मष इस छोड़ी गई साँस के साथ बाहर निकल रहे हैं । इन कल्मषों के मिल जाने के कारण साँस खींचते समय जो शुभ्र वर्ण तेजस्वी प्रकाश भीतर गया था, वह अब मलीन हो गया और होकर साँस के साथ बायें नथुने की इड़ा द्वारा बाहर निकल रहा है ।

(7) दोनों नथुने फिर बन्द कर लीजिए । फेफड़ों को बिना साँस के खाली रखिए । ध्यान कीजिए कि बाहरी प्राण बाहर रोक दिया गया है । उसका दबाव भीतरी प्राण पर बिल्कुल भी न रहने से वह हलका हो गया है । नाभिक चक्र में जितना प्राण सूर्य पिण्ड की तरह एकत्रित था वह तेज-पुंज की तरह ऊपर की ओर अग्नि शिखाओं की तरह ऊपर उठ रहा है । उसकी लपटें पेट के उर्ध्व भाग, फुफ्फुस को वेधती हुई कण्ठ तक पहुँच रही है । भीतरी अवयवों में सुषुम्ना नाड़ी में से प्रस्फुटित हुआ यह गौण तेज अंतःप्रदेश को प्रकाशवान् बना रहा है ।

(8) अँगूठे से दाहिना छिद्र बन्द कीजिए और बायें नथुने से साँस खींचते हुए ध्यान कीजिए कि इड़ा नाड़ी द्वारा सूर्य प्रकाश जैसा प्राण-तत्व साँस से मिलकर शरीर में भीतर प्रवेश कर रहा है और वह तेज सुषुम्ना विनिर्मित नाभि-स्थल के सूर्य चक्र में प्रवेश करके वहाँ अपना भण्डार जमा कर इस प्रकार पाँच अंगों में विभाजित इस प्राणाकर्षण प्राणायाम को नित्य ही जप से पूर्व करना चाहिए । आरम्भ ५ प्राणायाम से किया जाय । अर्थात उपरोक्त क्रिया पाँच बार दुहराई जाय । इसके बाद हर महीने एक प्राणायाम बढ़ाया जा सकता है । यह प्रक्रिया धीरे-धीरे बढ़ाते हुए एक वर्ष में आधा घण्टा तक पहुँचा देनी चाहिए''


नाड़ी शोधन प्राणायाम

(१) प्रातः काल पूर्व को मुख करके कमर सीधी रखकर सुखासन से, पालथी मार कर बैठिये । नेत्रों को अधखुले रखिए ।

(२) दाहिना नासिका का छिद्र बन्द कीजिए । बाएँ छिद्र से साँस खींचिए और उसे नाभिचक्र तक खींचते जाइए ।

(३) ध्यान कीजिए कि नाभि के स्थान में पूर्णिमा के पूर्ण चन्द्रमा के समान पीतवर्ण शीतल प्रकाश विद्यमान है । खींचा हुआ साँस उसे स्पर्श कर रहा है ।

(४) जितने समय में साँस खींचा गया था, उतने ही समय भीतर रोकिये और ध्यान करते रहिए कि नाभिचक्र में स्थित पूर्ण चन्द्र के प्रकाश को खींचा, प्रकाशवान् बन रहा है ।



(५) जिस नथुने से साँस खींचा था, उसी बायें छिद्र से बाहर निकालिये और ध्यान कीजिए कि नाभिचक्र के चन्द्रमा को छूकर वापिस लौटने वाली प्रकाशवान् एवं शीतल वायु इड़ा नाड़ी की छिद्र नलिका को शीतल एवं प्रकाशवान् बनाती हुई वापिस लौट रही है ।

(६) कुछ देर साँस बाहर रोकिए और फिर उपरोक्त क्रिया आरम्भ कीजिए । बायें नथुने से ही साँस खींचिए और उसी से निकालिए । दाहिने छिद्र को अँगूठे से बन्द रखिए । इसी को तीन बार कीजिए ।

(७) जिस प्रकार बायें नथुने से पूरक, कुम्भक, रेचक, बाह्य कुम्भक किया था, उसी प्रकार दाहिने नथुने से भी कीजिए । नाभिचक्र में चन्द्रमा के स्थान पर सूर्य का ध्यान कीजिए और साँस छोड़ते समय भावना कीजिए कि नाभि स्थित सूर्य को छूकर वापिस लौटने वाली वायु श्वास नली के भीतर उष्णता और प्रकाश उत्पन्न करती हुई लौट रही है ।

(8) बायें नासिका स्वर को बन्द रखकर दाहिना छिद्र से भी इस क्रिया को तीन बार कीजिए ।

(9) अब नासिका के दोनों छिद्र खोल दीजिए । दोनों से साँस खींचिए और भीतर रोकिए और मुँह खोलकर साँस बाहर निकाल दीजिए । यह विधि एक बार ही करना चाहिए ‍
तीन बार बायें नासिका छिद्र से साँस खींचते और छोड़ते हुए नाभि चक्र के चन्द्रमा का शीतल ध्यान, तीन बार दाहिने नासिका छिद्र से साँस खींचते छोड़ते हुए सूर्य का उष्ण प्रकाश वाला ध्यान, एक बार दोनों छिद्रों से साँस खींचते हुए मुख से साँस निकालने की क्रिया यह सात विधान मिलकर एक नाड़ी शोधन प्राणायाम बनता है ।

प्राणायाम के अभ्यासी के लिए कुछ सामान्य नियमों का पालन बहुत आवश्यक हैः-
1. प्राणायाम शुद्ध वायु में खुले स्थान में करें घर में करें तो कमरे की खिड़कियाँ खुली रहें और स्थान यथा सम्भव शान्त हो ।
2. प्राणायाम के समय शरीर में बहुत अधिक वस्त्र न लादें जायें ।
3. प्राणायाम के बाद वजनदार वस्तुयें न उठायें तथा स्वर्ण, चाँदी आदि धातुओं को छोड़कर कुचालक धातु जैसे लोहे आदि का स्पर्श न करें ।
4. तुरन्त पेट भर भोजन न करें हलका और सात्त्विक आहार ही इन दिनों ग्रहण किया जाए पर पानी बिना प्यास के भी दिन में बार-बार पियें ।
5. ब्रह्मचर्य व्रत का यथा सम्भव अधिक से अधिक पालन करना चाहिए ।

गायत्री उपासक का संकल्प जब प्राणायाम प्रक्रिया के साथ जुड़ता है, तो ब्रह्माण्ड व्यापी महाप्राण-तत्व उसकी ओर विशिष्ट रूप से प्रवाहित हो उठता है । साधक की आस्था के अनुरूप प्राणानुदान दयामयी की कृपा से प्राप्त होने लगते हैं । इस तरह प्राणायाम के अभ्यास से गायत्री उपासना से उपार्जित प्राण शक्ति की मात्रा द्रुत-गति से बढ़ती है और साधक को लौकिक, भौतिक एव आध्यात्मिक क्षमताओं से विभूषित कर देती है ।

साभार : अखिल विश्व गायत्री परिवार
(गायत्री महाविद्या का तत्वदर्शन पृ.12.45)

शुक्रवार, १९ जून २००९

ऋषिकेश

ऋषिकेश - पावन तीर्थ स्थल

जहाँ गंगा पहाडों से निकल कर मैदान की तरफ़ आती है और अंत में गंगा सागर में मिल जाती है। आओ गंगा मैया का वंदन करें।

१। ऋषिकेश का विहंगम दृश्य



२। गंगा नदी में नहाते और प्राथना करते हुए लोग



३। लाक्स्मन झूला में आनंद लेते हुए पर्यटक

हरिद्वार, ऋषिकेश और शिपुरी जरूर देखें। यह हमारी वेद् पुराण की नगरी है ....

शिवपुरी (ऋषिकेश)

शिवपुरी, ऋषिकेश से करीब २५ किलो मीटर है । जहाँ से राफ्टिंग का मजा लिया जा सकता है। शिवपुरी के सुंदर दृश्य आपके लिए :

१। गंगा की विशाल हृदय और राफ्टिंग का मजा लेते हुए पर्यटक


२। गंगा से निकली एक चोटी धारा




३। राफ्टिंग के तैयारी में जुटे पर्यटक




यदि आप ऋषिकेश जाते हैं तो शिवपुरी जरूर जाएँ

पतंजलि योग पीठ

मुझे पतंजलि योग पीठ, हरिद्वार देखने का अवसर मिला। स्वामी राम देव जी ने और श्री बालकिशन जी ने वास्तव में बड़ा महान काम किया है। कुछ योग पीठ के द्रश्य :


1। योग पीठ का मुख्यद्वार


2 योग पीठ का मुख्य भवन





२। अन्नपूर्ण भवन - शुद्ध भोजन शाला

३। ॐ का सुंदर द्रश्य

४। सुंदर बगीचों का आनंद लेते हुए मरीज


५। खुली हवा में साँस लेने का अलग ही मजा है

पतंजलि योग पीठ अवश्य जाएँ .

सोमवार, ११ मई २००९

रेल म्यूज़ियम - न्यू दिल्ली - Rail Museum Delhi

You can see all old Trains in the museum.


Rail museum is surrounded by beautiful park.


Old Rail coach, used by Britishers when they were in India


A rare engine at Rail museum.


Princely railway coaches - used by Indian Kings.


It's a beautiful museum with green grass where you can take rest for a while.


Old small coaches & engines .


Hero engine - the memories of past.


Entrance road to the Railway museum


Toy train in the railway museum - A wonderful joy ride experience.


This joy train was made in 1979 at Railway coach factory in south at Perambur


A young boy is enjoying the joy train ride at Rail museum - New Delhi


In the museum - You can see the models of various trains.


Model trains in the museum - A wonderful place where you can

see the models and old history of Railway.


ABOUT NATIONAL RAIL MUSEUM

National Rail Museum is situated in Chanakyapuri, New Delhi . It is a
must-visit for those who have interest in Indian Railways &
locomotives. There are various models of train, engines and coaches in
the museum. It also preserves the model of India's very first train, a
steam engine that made its journey from Mumbai to Thane in 1853. There
are a number of locomotives displayed in the open, which are simply
lovable. The museum, sprawling across 10 acres of land, is a storehouse
of information on the 150-yr old history of railways in India. Children
love the ride in the toy train on the miniature rail track around the
museum. The highlight of the museum is the Fairy Queen built in 1855,
which is the best-preserved locomotive of its times.

Some of the prized possessions of the museum are the vintage displays,
including the still-working oldest locomotive in the world. Besides
this, there is the Viceregal Dining Car that was built in 1889. The
museum also possesses the lavish royal coaches of the Prince of Wales
Saloon built in 1875, Maharaja of Mysore's Saloon built in 1899 and the
Maharaja of Baroda's Saloon built in 1886. These saloons that were built
specially for the imperial personages display elaborate interior design
befitting the grandeur of the sovereigns. These coaches are unique in
the world and nothing can match up to their splendor.



GKIndian

रेल म्यूज़ियम - नई दिल्ली

रेल म्यूज़ियम - नई दिल्ली

सोमवार, ४ मई २००९

भीमताल, सातताल और नाकुचियाताल के सुन्दर द्रह्स्य

This is Bheemtal, 22 KM away from Nainital. The lake of Bheemtal is bigger than the lake of Nainital. Bheemtal is a calm and quite place on the lap of nature.



The views of Bheemtal town from my Hotel, surrounded by beautiful hills.



Lovely flowers on the way to Bheemtal Lake.



Beautiful flowers on the way to Bheemtal.



View of Bheemtal lake from the Road.



Shops near Bheemtal lake



Golu Temple near Bhowali, place is called Ghoda Khaal.



Bhowali Town - Scene of a Pradarshini



View of Tea Garden on the way to Bhowali to Ramgarh



Nakuchia Taal is away from Bheemtal - A scenic beuty place.



Nakuchia Taal - Beautiful lake on this earth surrounded by hills.



Bunglows, Hotels and Guest houses near Nakuchia taal



View of Sat Tal



Sattal Lake



You can enjoy boating at Sat Tal - Its a beautiful place. You can get the real kumoni food at Sattal. Govt Hotel is also good



Broken Boat - This boat has seen the tourist from all over the world.

Around Sat Tal, there are so many small tals.



A village Temple of Bhagwan Shiva in Bhairav form.



Beautiful view of lake from the road.



GKIndia.

रानीखेत के सुन्दर द्रश्य

Visitors are enjoying the natures' beauty at Ranikhet.




View of Deep valley at Ranikhet. View of jaman village.




नैनीताल के सुन्दर द्रश्य

Beautiful Roads from Kathgodam to Nainital.

(इन उम्र से लम्बी सड़कों को मंजिल पे पहुचते देखा नही )



Life is to go ........... (जीवन चलने का नाम चलते रहो सुबह शाम )



Natures beauty - Kathgodam to Naintial

(ये पर्वतों के दायरे................... )


Beautiful hills - Kathgodam to Nainital



Street market at Mallital - Nainital



Tourist are busy in buying things from the market - Nainital City



Tourist are at Mallital market.



Beautiful Roads in and around Nainital।



This is me who is enjoying his hill driving for the first time.

( जिंदगी एक सफर है सुहाना जहाँ कल क्या हो ये किसने जाना ............................ )



View of Nainital Lake from the Hotel Ankur Plaza.



Hotel Ankur Plaza at mallital, Nainital.



Appu Ghar , Ropeway station at Mallital, Nainital.



Mallital - Nainital



Tourist is enjoying the morning of Nainital.



Aipan - The art of uttaranchal - It is made on any spiritual ocassion in the Uttaranchal.



Tourist are enjoying the evening at Mallital - Nainital.



Naini lake - You can see the Boat Club at mallital.

( ओह मांझी .. ले चल पार - मेरे साजन हैं उसपार ............. )


You can walk around Nainilake for full enjoyment.



Nainilake from the corner, away from crowd.



One young tourist is enjoing shooting at mallital.



Zoo of Nainital, from where you can see the entire Nainital.


नैनिताल
पर्यटन की द्रष्टि से नैनिताल बहुत ही अच्छी जगह है जहाँ पर आप पानी, पहाड़, शहर और प्रकर्ति का पूरा नजारा देख सकते हैं. नैनिताल के उपरी भाग को मल्लीताल और नीचला भाग तल्लीताल कहते हैं. मल्लीताल में फ्लैट का खुला मैदान है। मल्लीताल के फ्लैट पर शाम होते ही मैदानी क्षेत्रों से आए हुए सैलानी एकत्र हो जाते हैं। यहाँ नित नये खेल - तमाशे होते रहते हैं। संध्या के समय जब सारी नैनीताल नगरी बिजली के प्रकाश में जगमगाने लगती है तो नैनीताल के ताल के देखने में ऐसा लगता है कि मानो सारी नगरी इसी ताल में डूब सी गयी है। संध्या समय तल्लीताल से मल्लीताल को आने वाले सैलानियों का तांता सा लग जाता है। इसी तरह मल्लीताल से तल्लीताल (माल रोड) जाने वाले प्रकृतिप्रेमियों का काफिला देखने योग्य होता है।

नैनीताल की कुछ द्रश्य जो आपको अच्छे लगगें.

GKIndia -

शुक्रवार, १ मई २००९

sending some photo

मंगलवार, १४ अप्रैल २००९

ALL ABOUT UTTARAKHAND

"Beautiful Nainital"

UTTARAKHAND


ABOUT UTTARAKHAND

Uttarakhand is the 27th state of the Republic of India. (total states being 28) It was formed on 9th Nov 2000 and was carved out of Uttar Pradesh after a long struggle of the Uttaranchali people. Uttarakhand lies in the Northern part of India amidst the magnificent Himalayas and dense forests. The state is bordering Himachal Pradesh in the north-west and Uttar Pradesh in the South and has international borders with Nepal and China.

The State today with 13 Districts can be grouped into three distinct geographical regions, the High mountain region, the Mid-mountain region and the Terai region. Dehradun is the interim-capital city. Uttaranchal consists of 13 districts viz., Almora, Pauri Garhwal, Tehri Garhwal, Bageshwar, Chamoli, Haridwar, Champawat, Nainital, Dehradun, Udham Singh Nagar, Uttarkashi, Pithoragarh, Rudraprayag.

The land area is about 55,845 sq km. The region is mostly hilly (approx 88 percent) and the remaining 12 percent falls in the plains.The state is very rich in natural resources especially water and forests as it has many glaciers, rivers, forests, mountain peaks. The famous peaks of Uttaranchal are Nanda Devi, Kedarnath, Trishul, Bandarpunch and Mt Kamet. The major Glaciers include Gangotri, Pindari, Milam and Khatling. The Ganga, The Yamuna, Ramganga and Sharda are principal rivers of this region.

CAPITAL OF UTTARAKHAND

The city of Dehradun, has been declared as the interim capital of the new state. Though the debate on making Gairsain as the new capital is still on.
Dehradun is situated at the Himalayan foothills in the fertile Doon Valley. The valley is well known for its salubrious climate and natural beauty. It is due to this reason, Dehradun has been one of the favorite residential cities. It is also an important educational centres of the country. Some of the best public schools and convents are housed here.The Indian Military Academy, The Froest Research Institute, the Oil and Natural Gas comission and many more offices of Central and State Govt. are also situated here. Dehradun is one of the most important town in the new state and is well linked with rail, road and air routes to all the parts of the country.

Words fail to describe the awesome charm and enchanting beauty of this magical land. The splendor and the beauty of the land is to be seen and and felt. Blessed with magnificent glaciers , sparkling and joyful rivers, gigantic and ecstatic Himalayan peaks, natural biospheres, valley of flowers, skiing slopes and dense forests, this abode of Gods includes many shrines and places of pilgrimage. Char-dhams, the four most sacred and revered Hindu temples: Badrinath, Kedarnath, Gangotri and Yamunotri are nestled in the Mighty Mountains.This is the land where Vedas and Shastras were composed and great Indian epic- The Mahabharath- was written. The land has always been the source of inspiration for nature lovers and seekers of peace and spirituality.

DISTRICTS OF UTTARAKHAND

1.Almora
Almora is a hill district in the central Kumaon region of Uttaranchal. It is a beautiful scenic place situated at an altitude of 5900 ft. It was founded by Raja Kalyan of Chand Dynasty in 1560AD. There is a cave where Swami Vivekanand meditated and was enlightened. Almora was captured by British from Gorkhas, who have left their mark on this town. Nanda Devi festival is celebrated here, during which devotees from all over India visit this place. Almora is very popular among tourists from nearby cities who come here during the summer for a holiday. There are very enchanting spots nearby. Kumaoni is the major language spoken here. The nearest railroad station is Kathgodam from where jeeps or bus has to be taken to reach this place. There are several lodges, hotels and Forest rest house.

2. Bageshwar
Bageshwar is a district town locaed in enchanting surroundings. According to mythology Lord Shiva had wandered this place transformed as a tiger. There is Baghwat temple dedicated to Lord Shiva, build by Raja Laxmi of Chand Dynasty. Many pilgrims visit this temple during the Uttarayan fair. This place is also frequented by trekkers since it is the starting place for Pindari, Sunderdhunga and Kafni glaciers. Almora is 90 kms away, the nearest railroad is Kathgodam.

3. Champawat
Champawat is a historical place with magnificent scenery and landscape.. There are many ancient temples viz’ Baleshwar Temple, Rataneshwar Temple. There are many lodges and hotels. The nearest railroad is Tanakpur.

4. Pithoragarh
This is the northernmost district town in the kumaon region of Uttaranchal. This place is endowed with natural charming beauty with many valleys and snow covered mountains. This place is the starting point to Mansarover lake and Mount Kailas which is revered by Hindus. The nearest railroad is Tanakpur and the nearest airport is Naini Saini.

5. Udham Singh Nagar
This is the new district of Uttaranchal. It is named after freedom fighter Udham Singh who had killed General Dyer of JallianWala Bagh massacre. It is a very beautiful and charming tourist spot.

6. Nainital
This is the lake town in the hilly region of Kumaon. The city is built around the lake Naini, and the city is surrounded by seven mountains Sapta Shring. Nainital was the summer capital of UttarPradesh for many years during Bristish regime and also after independence. It is said in mythology that when Lord Shiva was carrying the body of Sati, her eyes fell at this place and came to be known as Naini Tal. The nearest railroad is Kathgodam, this place is very popular with tourists of nearby towns especially Delhi who come here to escape the scorching heat of the capital city. Nearby places of interests are BhimTal, SatTal.

7. Pauri-Garhwal
Pauri is the Headquarter of Pauri-Garhwal district and Garhwal division. It is situated at a height of 1814 mts, on the northern slopes of kandolia hills.
Pauri provides a delightful view of the snow clad Himalayan peaks of Bandar-Punch. It is a beautiful small town with lush green forests and scenic landscape. The forests of Deodar covered with mist and the peaceful surroundings makes Pauri an ideal place for holiday. There are many educational institutes and a large number of picnic spots. Kandolia Gap and Nag tibba are two important picnic spots.

8. Tehri-Garhwal
Tehri is the headquarter of Tehri-Garhwal district and is situated at an altitude of 770 mts (2,3256 ft) It is situated at the confluence of Bhagirathi and Bhilangana rivers.
The town is located in a wide open valley which is quite warm in the summer.The forests of birch and pine on the steep slopes of himalaya, surround the valley.. this important town is at the jucntion of fiver important roads which branch off to Rishikesh, Deoprayag, Uttarkashi, Srinagar and Tilwara.While coming from Rishikesh 83 km from rishikesh, the road to uttarkashi and dharasu branches at dobata.

Prior to india’s independence, Tehri was capital of the princely state of Tehri-Garhwal. Maharaja Sudarshan Shah founded the town in 1803. Earlier to this, Srinagar (Garhwal) used to be the capital. The palaces and temples built by the old rulers can still be seen at Tehri and the adjoining places.The Tehri Hydel Development Corporation has undertaken the construction of Tehri Dam on river Bhagirathi and the project is estimated to generate 2400 MW of electricity for the nation and irrigate vast areas in the region. It has the potential of growing into a important tourist centre.

9. Dehradun
Dehradun is the capital city of the state of Uttaranchal. It is situated in the Doon valley at the foothills of Himalaya with Ganga in the east and Yamuna in the west. Guru Dronacharya medidated here, which was then known as Drona Ashram. Sikh Guru Ram Rai camped here where the Ram Rai Durbar is located, presently it attracts lots of devotees and followers from India. The name Dehra (Camp) is derived from here. The British found the climate of Dehradun very pleasant and established many institutions here i.e. Forest Research Institute, Indian Military Academy, ONGC, Survey of India, best public schools viz’ Doon School, Welham School, Col. Brown school, Jesus & Mary Convent, St Josephs School. Very near from Dehradun is the hill resort of Mussoorie.
The nearby places of interest for the tourists are Tapkeshwar temple dedicated to Lord Shiva, Sahastra Dhara the sulphur springs, Robbers Cave a picnic spot, Dakpathar Barrage, Tapovan a place where Guru Drona did penance, Kalanga Monument for Gorkha Gen Balbhadra Thapa, Ashoka Edict at Kalsi.

10. Uttarkashi
Uttarakashi is a big town and is situated near the river Bhagirathi. This historic town has lot of ancient monuments and temples. It is a tourist halt place and lot of hotels and lodges and market cater for them. The most famous temples is Lord Viswanath temple, dedicated to Lord Shiva. Nearby there is Shakti temple which has a old brass trident which is 26ft high and a base circumference of 9feet. There is also a temples of Parshuram. There are lot of similarities with town of Kashi, hence the name. This town has a power project .e. Maneri-Bhali and provides 93MW of power. This town also has the prestigious Nehru Institute of Mountaineering.

11. Chamoli
Chamoli is situated near the river Alaknanda on the way to Badrinath. Its is a small town and usually not used by tourists as a night halt. It is 10km further from Nandprayag and 10km before Gopeshwar.

12. Rudraprayag
Rudrapayag as the name specifies is the town situated near the meeting place of two rivers Alaknanda and Mandakini. It is a town on the way to Badrinath from Srinagar. From here there are two roads one going to Kedarnath and other to Badrinath. It is a night halt place for pilgrims and has many hotels and lodges and market. There is a small temple dedicated to Goddess Durga, called Jagdamba Devi Temple. There is also an old temple dedicated to Lord Shiva called Rudranath temple. Narad Muni medidated here for several years, Lord Shiva blessed him with perfection in music.

13. Haridwar
The name Haridwar signifies the gateway to the God, since this is the place where the pilgrimage to two famous temples Kedarnat (Lordh Shiva) and Badrinath (Lord Vishnu) is started. It is situated on the banks of river Ganga and at the foothills of Shivalik mountains. This was the place of meditation for sages and rishis. Sage Kapil meditated here and this place was called Kapilasthan. It is one of the four places where Kumbh mela is held every 12 years, millions of people take holy dip in the river Ganges to get rid of their sins. It is said that the pitcher of Amrit was kept in hiding here by Devtas when it was unearthed from Sagar Manthan. The same pitcher was taken to other i.e. Allahabad, Ujjain and Nasik, in the struggle with Asuras the pitcher broke spilling some sacred water “Amrit”, since then these places became very holy and the Kumbh mela is held every 3 years in these cities in succession. Lots of devotees throng this place to take a holy dip in the Ganges, every evening Arti is performed in Har-ki-Pauri. There is a slab where the footprints of Lord Vishnu is present. The nearby places of interest for the tourists are Har-ki-Pauri, Ram Krishna Mission Seva Ashram, Gurukul Kangri University, Sapta Rishi Ashram, Bharat Heavy Electricals Factory, Mansa Devi Temple.

Uttarakhand’s Story of Statehood

The movement in the hills of Uttar Pradesh for a separate State of Uttarakhand is the biggest movement in the history of the region, even bigger than the famous Tilari agitation, which was launched in 1930 in the riyasat of Tehri Garhwal for people’s rights over forests and forest produce…

The demand for a separate State of Uttarakhand and creation of local political outfits like the Uttarakhand Kranti Dal, the Uttarakhand Jan Sangharsh Vahini, the Uttarakhand Mukti Morcha, the Uttarakhand Party, the Uttarakhand Jan Morcha, the Uttarakhand Raksha Manch, the Uttarakhand Shanti Vahini, and dozens of action Committees is the expression of the demands of a neglected people.

The genesis of the ongoing agitation is remarkable in many ways. It took off as a protest against the implementation of reservation for OBCs. Eventually, it resulted first, in the demand for including the entire Uttarakhand region in the list of the OBCs and then, in the demand for a separate hill State…

The question of Uttarakhand State is directly associated with the issue of the management of the Himalayan region. Failure in managing the Himalayan eco-system will lead to a catastrophe. An expert group of the Planning Commission recommended strongly creation of an apex body such as the Himalayan Development Authority (HDA) to address the major issues and to evolve a policy framework for effective management. The formation of a separate State of Uttarakhand will be a step in the direction of proper management of the Himalayas.

The Uttarakhand movement needs to be seen in the light of the historically independent identity of the region. The region was able to maintain its political, economic, and cultural identity from the earliest times to the late eighteenth century. The Malla occupation and Rohila invasion did not have a lasting impression on the life of its people and these incidents were merely passing phases of local history.

Today, socio-economic problems, large-scale unemployment, and the disillusionment with the State and Central Governments have given a new dimension to the question of Uttarakhandi identity. The people of Garhwal and Kumaon have also realised that they do not have different political ends to pursue or, for that matter different identities, to adopt, since they are a single people in all respects. The rise of Garhwal and Kumaon as two independent principalities has become irrelevant for them and a thing of the past. The only salvation, if there is one, lies in this identity.

One cannot ignore the fact that a new kind of socio-political alignment has emerged in the ongoing movement. Even during earlier times, such alignments emerged after every major political event, be it the Rohila war, the Gorkha occupation, or British rule. After each of these events, history was re-invented to legitimise the newly acquired socio-political status of certain people who emerged dominant in the changed political circumstances.

This will also happen in the near future when a separate State is formed. But, this time, it will be the turn of the common man. And, the same current is flowing throughout Uttarakhand as the whole region is united in a cultural bond. Otherwise, the reaction to the brutal massacres in Khatima and Mussoorie would not have been equally intense throughout the region.

Uttarakhand’s story since Independence has been one of persistent exploitation of its forests and mineral wealth and neglect of its people. The neglect of regional aspirations led to the emergence of this movement as early as 1952 when P. C. Joshi of the undivided Communist Party of India raised this demand. Even Pandit Nehru envisaged division of UP, with complete statehood for Uttarakhand. But G. B. Pant, who hailed from the same region, opposed the idea and that was the end of the matter as far as the national polity was concerned. Nehru, at the Shrinagar Congress Session, advocated the idea of a separate administrative set up for the region.

The attitude of the Central Government is about to lead to the situation going out of control. The people are convinced that the Government is not at all serious about their demand. The sentiments of the local people need to be addressed properly, otherwise the Government would have to face a very piquant situation.

The region has more than three lakh ex-soldiers and ex-paramilitary personnel. Most women of the region know how to handle rifles. The Government got a taste of what might be in the offing when ex-soldiers took out well-attended rallies in the region wearing their uniforms.

Source: Suresh Nautiyal, The Observer (New Delhi), September 29, 1994.


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नैनीताल झील का मनोरम द्रश्य

भारतीय राज्य उत्तराखंड का एक जिला है । मूलतया य शहर अन्ग्रेजो के जमाने मे पर्वतीय स्थान के रूप में प्रसिद्ध हुआ. यहां नैना देवी का एक प्रसिद्ध मन्दिर है. नगर के बीचोंबीच एक झील भी है जिस की आकृति देवी की आंख यानि “नैन” जैसी है. इसी झील (ताल) के कारण इस स्थान का नाम नैनीताल पडा. नैनीताल आज भारत के प्रसिद्ध हिल स्टेशन में नैनीताल एक है। यहाँ हर साल यहां गर्मियों में पर्यटक प्रकृति का आनंद उठाने आते हैं.

नैनीताल के ताल के दोनों ओर सड़के हैं। ताल का मल्ला भाग मल्लीताल और नीचला भाग तल्लीताल कहलाता है। मल्लीताल में फ्लैट का खुला मैदान है। मल्लीताल के फ्लैट पर शाम होते ही मैदानी क्षेत्रों से आए हुए सैलानी एकत्र हो जाते हैं। यहाँ नित नये खेल - तमाशे होते रहते हैं। संध्या के समय जब सारी नैनीताल नगरी बिजली के प्रकाश में जगमगाने लगती है तो नैनीताल के ताल के देखने में ऐसा लगता है कि मानो सारी नगरी इसी ताल में डूब सी गयी है। संध्या समय तल्लीताल से मल्लीताल को आने वाले सैलानियों का तांता सा लग जाता है। इसी तरह मल्लीताल से तल्लीताल (माल रोड) जाने वाले प्रकृतिप्रेमियों का काफिला देखने योग्य होता है।

नैनीताल, पर्यटकों, सैलानियों पदारोहियों और पर्वतारोहियों का चहेता नगर है जिसे देखने प्रतिवर्ष हजारों लोग यहाँ आते हैं। कुछ ऐसे भी यात्री होते हैं जो केवल नैनीताल का "नैनी देवी" के दर्शन करने और उस देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने की अभिलाषा से आते हैं। यह देवी कोई और न होकर स्वयं 'शिव पत्नी' नंदा (पार्वती) हैं। यह तालाब उन्हीं की स्मृति का द्योतक है।

नैनीताल के कुछ चित्र
१। नैनीताल का मनोरम द्रश्य -चिडिया घर से लिया गया चित्र )


















२. पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त जी की मूर्ति मल्लीताल, माल रोड, नैनीताल।


















३। नैनीताल का जू (चिडिया घर )


















४. नैनीताल की शांत और सुंदर झील सबके मन को आंदोलित करती है।
यह बोट क्लब का सीन है जो माल रोड के पास है ।


















५। यह कुमाओं का प्रसिद्ध ऐपन कला है । जो यहाँ की सम्रध संस्कृति को दर्शाती है.
पहाड़ में कोई भी मंगल काम हो एपन जरुर बनाये जाते है.


















६. यह चित्र मैंने मल्लीताल अपने होटल अंकुर प्लाजा से लिए है।
जहाँ से भी देखो शांत ही नजर आती है।
मुझे पन्त जी एक कविता याद आती है।
"लो चित्र शलभ सी पंख खोल
उड़ने को है कुसुमित घटी "




















७. नैन्तिअल का मल्लीताल का पटरी मार्केट जहाँ पर्यटक अपनी मन पसाद का सामन खरीदते है।
मल्लीताल में सभी प्रकार के रेस्तौरांत है जहाँ आप अपने बजट के हिसाब से भोजन कर सकते हैं।


















८. सुंदर पड़ी पुष्प जिनकी छठा देखते ही बनती है।


















नैनीताल की खोज
सन् १८३९ ई. में एक अंग्रेज व्यापारी पी. बैरन था। वह रोजा, जिला शाहजहाँपुर में चीनी का व्यापार करता था। इसी पी. बैरन नाम के अंग्रेज को पर्वतीय अंचल में घूमने का अत्यन्त शौक था। केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा करने के बाद यह उत्साही युवक अंग्रेज कुमाऊँ की मखमली धरती की ओर बढ़ता चला गया। एक बार खैरना नाम के स्थान पर यह अंग्रेज युवक अपने मित्र कैप्टन ठेलर के साथ ठहरा हुआ था। प्राकृतिक दृश्यों को देखने का इन्हें बहुत शौक था। उन्होंने एक स्थानीय व्यक्ति से जब 'शेर का डाण्डा' इलाके की जानकारी प्राप्त की तो उन्हें बताया गया कि सामने जो पर्वत हे, उसको ही 'शेर का डाण्डा' कहते हैं और वहीं पर्वत के पीछे एक सुन्दर ताल भी है। बैरन ने उस व्यक्ति से ताल तक पहुँचने का रास्ता पूछा, परन्तु घनघोर जंगल होने के कारण और जंगली पशुओं के डर से वह व्यक्ति तैयार न हुआ। परन्तु, विकट पर्वतारोही बैरन पीछे हटने वाले व्यक्ति नहीं थे। गाँव के कुछ लोगों की सहायता से पी. बैरन ने 'शेर का डाण्डा' (२३६० मी.) को पार कर नैनीताल की झील तक पहुँचने का सफल प्रयास किया। इस क्षेत्र में पहुँचकर और यहाँ की सुन्दरता देखकर पी. बैरन मन्त्रुमुग्ध हो गये। उन्होंने उसी दिन तय कर ड़ाला कि वे अब रोजा, शाहजहाँपुर की गर्मी को छोड़कर नैनीताल की इन आबादियों को ही आबाद करेंगे।

पी. बैरन 'पिलग्रिम' के नाम से अपने यात्रा - विवरण अनेक अखबारों को भेजते रहते थे। बद्रीनाथ, केदारनाथ की यात्रा का वर्णन भी उन्होंने बहुत सुन्दर शब्दों में लिखा था। सन् १८४१ की २४ नवम्बर को, कलकत्ता के 'इंगलिश मैन' नामक अखबार में पहले - पहले नैनीताल के ताल की खोज खबर छपी थी। बाद में आगरा अखबार में भी इस बारे में पूरी जानकारी दी गयी थी। सन् १८४४ में किताब के रुप में इस स्थान का विवरण पहली बार प्रकाश में आया था। बैरन साहब नैनीताल के इस अंचल के सौन्दर्य से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने सारे इलाके को खरीदन का निश्चय कर लिया। पी बैरन ने उस लाके के थोकदार से स्वयं बातचीत की कि वे इस सारे इलाके को उन्हें बेच दें।

जय नंदा देवी.
जीके इंडियन



रामपुर के पास ढाबा

काठगोदाम से नैनीताल मार्ग का द्रश्य















नैनीताल मार्ग का द्रश्य



मुरादाबाद से काठगोदाम मार्ग


मुरादाबाद से काठगोदाम हाईवे का फोटो


शुक्रवार, १३ मार्च २००९

कर्मचारियों के लिए गीता ज्ञान


प्रिय
मित्रों, किसी मित्र ने मुझे एक मेल भेजा है। जिसमे श्री कृष्णा कर्मचारियों के लिए गीता उपदेश दे रहे हैं। आप भी सीखिए और आनंद लीजिये।

प्रेमिका और पत्नी

नौकर (मालिक से) : जब कोई ग्राहक सामान खरीदने आता है तो आपको कैसे पता चलता है कि ये प्रेमी-प्रेमिका हैं या पति-पत्नी।

मालिक ने कहा : जो चुपचाप सामान खरीद ले वह प्रेमी-प्रेमिका, और जो मेरे साथ झगड़ें समझ लेना वो पति-पत्नी हैं।


हीटर और नल

पति : पत्नी रेलवे स्टेशन पहुंचे तो पत्नी एकदम घबरा कर बोली, 'अजी गजब हो गया। मैं बिजली का हीटर तो जलता ही छोड़ आई हूं।

पति : 'कोई बात- नहीं मैं भी पानी का नल खुला ही छोड़ आया हूं।'

पर्स

टैक्सी ड्राइवर (यात्री से), 'भाई साहब मैं मीटर चालू करना भूल गया हूं। इसलिए सोच रहा हूं कि आपसे कितने पैसे लूं।'

यात्री ने कहा, 'इसमें परेशान होने की कोई बात नहीं है। मैं भी अपना पर्स घर भूल आया हूं।'


दलबदलू नेता-


'कुत्ते को लेकर कहां जा रहे हो?'

'क्या बताऊं यार, मेरे टॉमी ने परसों सुबह-सवेरे शहर के जाने-माने दलबदलू नेता को काट लिया।'

'तब तो तुम्हें बहुत परेशानी हुई होगी?'

'हां, कुछ दिन तो दिक्कत होगी ही' डाक्टर ने कहा है, टॉमी को एक दिन छोड़ कर दस दिन तक पांच इंजैक्शन लगेंगे। यह भी कहा है कि नेता जी पर एक नजर रखना। उनका ठीक रहना बहुत जरूरी है।

जुआ-
एक पति ने अपनी पत्नी से पूछा- युधिष्टिर भी तो जुआ खेलते थे, फिर तुम मुझे क्यों रोकती हो?

पत्नी ने कहा- नहीं रोकूंगी। लेकिन याद रखना कि द्रौपदी के भी पांच पति थे।

रोटी-
एक भिखारी ने घर में आवाज लगाई, बाबूजी रोटी मिल जाएगी।

अंदर से आवाज आई, बीवी घर में नहीं है। भिखारी ने कहा- मुझे बीवी नहीं, रोटी चाहिए।

स्वर्ग में स्थान-
श्रोता ने संत से पूछा, 'स्वामी जी, धर्मग्रंथों में लिखा है कि सिगरेट पीने से स्वर्ग में स्थान नहीं मिलता। क्या यह सत्य है?' संत ने कहा,

'जी नहीं, सिगरेट आप जितनी ज्यादा पिएंगे, उतनी ही जल्दी स्वर्ग पहुंच जाएंगे।'

वॉकमैन-
मनोरोगी ने डॉक्टर से पूछा, 'महाशय, कई बार मुझे लगता है कि मेरे कान में कोई गुनगुना रहा है।' डॉक्टर ने कहा, 'अच्छा, ऐसा आपको कब लगता है?'

मनोरोगी ने कहा, 'जब मैं कान में वॉकमैन लगाकर सुनता हूं।'

बिल-
मेहमान ने बच्चे से कहा- वाह बेटे, तुम तो बहुत समझदार हो। अच्छा बताओ, बादल के साथ चमकने वाली और बल्ब जलाने वाली बिजली में क्या अंतर है?

बच्चे ने कहा- जो बिजली बादल के साथ चमकती है, उसका बिल नहीं भरना होता है।

पिटाई-
रमा ने पिता से कहा, 'आज मुझे टीचर ने बहुत मारा।

पिता ने कहा, 'जरूर तुमने कोई शैतानी की होगी।' रमा ने कहा, 'नहीं, मैं तो बिल्कुल चुपचाप सो रही थी।

क्रीम की शीशी-
एक महिला (केमिस्ट से): भाई साहब, रात को बच्चों को मच्छर बहुत काटते हैं, कोई दवा दे सकते हैं आप?
केमिस्ट ने क्रीम की शीशी दे दी। महिला ने पूछा: यह बच्चों को लगानी है या मच्छरों को



लघु कवितायें

नेताजी का शत्रु प्रेम

नेता
दल बदल रहे हैं
दलील है
हम शत्रुता भुलाकर
मित्रवत व्यवहार कर रहे हैं

जिंदगी

जिंदगी जी लें जी भर के आज
न जाने कल क्या हो जाए
ये वो बुलबुला है जो
न जाने कब फट जाए

शनि

रवि पुत्र शनि
चाहने वालों को
बना देता है धनी

दीदार

जबसे तेरा
दीदार हुआ है
जिंदगी में
रस आने लगा है

जवानी

आँखों से नींद गायब
रातें कटती नही
हाय ये जवानी भी
क्या चीज है .........

मंगलवार, १० मार्च २००९

कुछ कवितायें

चिराग

बनके चिराग
मन का अँधेरा दूर करो
कुछ ऐसे भी दिल होते हैं
जहाँ रौशनी नही होती।

उम्मीद

उम्मीद के दिए
हमेशा जलाके रखो
न जाने कब
दिवाली दस्तक दे जाए ।

जिंदगी

जिंदगी
कागज़ की नाव
न जाने कब डूब जाए
कहो तो आज
जश्न मानलें ।


धुआं

उठती हुई लपटें
और गहराता धुआं
आज ये शहर शांत सा क्यों है....

आतंक की चिंगारी ने
सब कुछ छीन लिया है.....

फिक्र

दुनिया ने मुझे क्या दिया
इसकी फिक्र नहीं मुझे ...

दुनिया को क्या दे सकता हूँ
इसकी फिक्र है मुझे .......

बुधवार, ४ मार्च २००९

पालम विहार















गुडगाँव रेलवे स्टेशन का द्रश्य

















पालम विहार शौपिंग काम्प्लेक्स का द्रश्य






















पालम विहार शौपिंग काम्प्लेक्स का द्रश्य






















कृष्ण मन्दिर - कार्टर पुरी ( ऐ ब्लाक पालम विहार के सामने )


















शनि मन्दिर
कृष्ण मन्दिर - कार्टर पुरी ( ब्लाक पालम विहार के सामने )

उत्तराँचल के सुंदर द्रश्य















पहाडो की गोद से निकलती है गंगा
तन और मन को शान्ति देती है गंगा
शिव जी की जटा से निकली है ये पावन गंगा
हर हर गंगे ..............
















बलखाती लहराती ये उत्तराँचल की सड़कें
और मदहोश कर देती हैं उत्तराँचल की हवाएं

















काफल पेट की आग बुझाए
तन मन दोनों खिल जाए
















सुरमयी शाम और झील का किनारा
ये तैरती किश्तियाँ
आज शाम को ठहर जाने दो
















मांझी ले चल उस पार
जहाँ है सुन्दरता अपार















प्रकर्ति से बड़ा ये कौन चित्रकार है
ये इंसान का बनाया संसार है

















शिवजी कैलाश वासी, बस गए हैं जागेश्वर
दर्शन करलो ये हैं विश्व के परमेश्वर

मंगलवार, ३ मार्च २००९

पल पल दिल के पास

प्रिया मित्रों, यह एक सुंदर फिल्मी गाना है जो वर्षों के बाद भी ताजा है। आप भी इसको एन्जॉय करो..................i

पल पल दिल के पास तू रहती हो
जीवन मीठी प्यास ये कहती हो
पल पल दिल के पास तू रहती हो

हर शाम आंखों पर
तेरा आँचल लहराए
हर रात यादों की
बारात ले आए
में साँस लेता हूँ
तेरी खुशबू आती है
इक महका महका सा
पैगाम लती है
मेरे दिल की धड़कन भी
तेरे गीत गाती है
पल पल दिल के पास तुम रहती हो
तुम सोचोगी क्यों इतना
में तुमसे प्यार करू
तुम समझोगी दीवाना
में भी इकरार करूँ
दीवानों की हे बातें
दीवाने जानते है
जलने में जो मजा है
परवाने जानते हैं
तुम यूँ ही जलाते रहना
आ आ कर ख्वाबों में
पल पल दिल के पास तुम रहती हो............


ये क्या हो रहा है

ये क्या हो रहा है
नेता जी परेशान हैं
और वोटर लाल हो रहा है
आरे यार "चुनाव" पास आ रहा है

इस जोड़ तोड़ की राजनीती में
कोई नही होती है नीति
हर किसी को है सीट से प्रीती
हर कोई हतियाने में लगा है

नेता लड़ रहे हैं
तू मुझे "ये" देगा तो में गठबंधन करूँगा
नहीं तो अकेले हे लडूंगा

वोटर परेशान है हैरान है
इधर कुआ उधर खाई है
वोट लेने वाला अभी भाई है
बाद में कसाई है

याद रख मेरे दोस्त
बकरे का तो एक ही दिन
कटने का होता है

उठ जा जाग जा
और बगावत कर
वोट का उपयोग कर ............

बचपन के दिन

वो बचपन के दिन भी क्या दिन थे
बन्दर बन पेड़ों की शाखाओं पर चढ़ना
कुछ खाना कुछ फेंकना
वो गली में गिल्ली डंडा खेलना
और पड़ोस के खिड़की दरवाजे तोड़ना
परीक्षा के पहले मंदिरों के दर्शन करना
परसेंटेज को गोली मारो, हे भगवान् बस पास करदेना
वो रामलीला के चर्चे, वो होली का हुरदंग
दिवाली हो या ईद बस मजे करना
वो बचपन की यादें एक मीठा एहसास
याद की गठरी बन कर रहता है पास
जिन्दगी भर मुस्करानो को ...............

सोमवार, २ मार्च २००९

महिलाओं के लिए टिप्स

१- पुरानी मच्छरदानी को फैंके नहीं बल्कि उनका उपयोग फ्रीज में सब्जी रखने के काम में ले सकते हैं।
२- यदि घर में चींटियाँ आ गई हों तो उन्हें भागने के लिए , उनके उप्पर हल्दी पाउडर छिड़क दें ।
३- यदि आपकी वाशिंग मशीन चलते वक्त हिलती हो तो उसके निचे रेगमाल (sand paper ) लगा दें।
४- पुरानी दवाईयों को फेंके नही बल्कि उनका पाउडर बनाकर फूलों के गमले में दाल दें।
५- तुंरत मिल्क शेक बनने के लिए ठंडे दूध में मनपसंद फ्रूट जेम की तीन चम्मच मिलाकर मिक्सी में चलालें।
६- घर के दरवाजे यदि आवाज करतें हो तो उनके कब्जों में मख्खन लगा सकते हैं।
७- कद्दू के जूस में यदि गोल्ड साफ किया जाए तो वे चमक उठेंगे ।
८- बेसन को पानी में घोलकर उसमे किचन के काले पीले कपड़े ४५ मिनट तक भिगायें, साफ़ हो जायेंगे।
९- जब एल्बम में फोटो पुरानी हो जाए तो पेट्रोल में हलके भीगे कपड़े से साफ कर दें।
१०- यदि पापड को लंबे समय के लिए ताजा रखना है तो बर्तन में कुछ मेथी दाने भी रख दें।

मंगलवार, २४ फरवरी २००९

घरेलु उपाय

में कुछ घरेलु उपचार लिख रहा हूँ। आप इन्हे अच्छे वैद जी की सलाह से ले सकते हैं क्योंकि आपकी बीमारी को देखते हुए वैद जी ही आपको सही सलाह दे सकते हैं।
कुछ उपाय निम्न प्रकार हैं। :-

तुलसी एक दिव्य पौधा है।
(कैंसर में भी लाभदायक )

तुलसी की २१ से ३५ पत्तियाँ स्वच्छ खरल या सिलबट्टे (जिस पर मसाला न पीसा गया हो) पर चटनी की भांति पीस लें और १० से ३० ग्राम मीठी दही में मिलाकर नित्य प्रातः खाली पेट तीन मास तक खायें। ध्यान रहे दही खट्टा न हो और यदि दही माफिक न आये तो एक-दो चम्मच शहद मिलाकर लें। छोटे बच्चों को आधा ग्राम दवा शहद में मिलाकर दें। दूध के साथ भुलकर भी न दें। औषधि प्रातः खाली पेट लें। आधा एक घंटे पश्चात नाश्ता ले सकते हैं। दवा दिनभर में एक बार ही लें परन्तु कैंसर जैसे असह्य दर्द और कष्टप्रद रोगो में २-३ बार भी ले सकते हैं।

इसके तीन महीने तक सेवन करने से खांसी, सर्दी, ताजा जुकाम या जुकाम की प्रवृत्ति, जन्मजात जुकाम, श्वास रोग, स्मरण शक्ति का अभाव, पुराना से पुराना सिरदर्द, नेत्र-पीड़ा, उच्च अथवा निम्न रक्तचाप, ह्रदय रोग, शरीर का मोटापा, अम्लता, पेचिश, मन्दाग्नि, कब्ज, गैस, गुर्दे का ठीक से काम न करना, गुर्दे की पथरी तथा अन्य बीमारियां, गठिया का दर्द, वृद्धावस्था की कमजोरी, विटामिन ए और सी की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग, सफेद दाग, कुष्ठ तथा चर्म रोग, शरीर की झुर्रियां, पुरानी बिवाइयां, महिलाओं की बहुत सारी बीमारियां, बुखार, खसरा आदि रोग दूर होते हैं।

यह प्रयोग कैंसर में भी बहुत लाभप्रद है।


सेब स्वस्थ के लिए लाभदायक
(कैंसर में भी लाभदायक )


दो पके मीठे सेब बिना छीले प्रातः खाली पेट चबा-चबाकर खाने से गुस्सा शान्त होता है। पन्द्रह दिन लगातार खायें। थाली बर्तन फैंकने वाला और पत्नि और बच्चों को मारने पीटने वाला क्रोधी भी क्रोध से मुक्ति पा सकेगा।

जिन व्यक्तियों के मस्तिष्क दुर्बल हो गये हो और जिन विद्यार्थियों को पाठ याद नहीं रहता हो तो इसके सेवन से थोड़े ही दिनों में दिमाग की कमजोरी दूर होती है और स्मरण शक्ति बढ़ जाती है। साथ ही दुर्बल मस्तिष्क के कारण सर्दी-जुकाम बना रहता हो, वह भी मिट जाता है।

कहावत है - "एक सेब रोज खाइए, वैद्य डाक्टर से छुटकारा पाइए।"

जोड़ों के दर्द (गठिया) का अचूक उपाय

बथुआ के ताजा पत्तों का रस पन्द्रह ग्राम प्रतिदिन पीने से गठिया दूर होता है। इस रस में नमक-चीनी आदि कुछ न मिलाएँ। नित्य प्रातः खाली पेट लें या फिर शाम चार बजे। इसके लेने के आगे पीछे दो - दो घंटे कुछ न लें। दो तीन माह तक लें।

या

नागौरी असगन्ध की जड़ और खांड दोनों समभाग लेकर कूट-पीस कपड़े से छानकर बारिक चुर्ण बना लें और किसी काँच के पात्र में रख लें। प्रतिदिन प्रातः व शाम चार से छः ग्राम चुर्ण गर्म दूध के साथ खायें। आवश्यकतानुसार तीन सप्ताह से छः सप्ताह तक लें। इस योग से गठिया का वह रोगी जिसने खाट पकड़ ली हो वह भी स्वस्थ हो जाता है। कमर-दर्द, हाथ-पाँव जंघाओं का दर्द एवं दुर्बलता मिटती है। यह एक उच्च कोटि का टॉनिक है।


पेट में कीडे

अजवायन का चूर्ण बनाकर आधा ग्राम लेकर समभग गुड में गोली बनाकर दिन में तीन बार खिलाने से सभी प्रकार के पेट के कीडे नष्ट होते है।

या सुबह उठते ही बच्चे दस ग्राम (और बडे २५ ग्राम) गुड खाकर दस - पन्द्रह मिनट आराम करें। इससे आंतों में चिपके सब कीडे निकलकर एक जगह जमा हो जायेंगे। फिर बच्चे आधा ग्राम (और बडे एक - दो ग्राम) अजवायन का चुर्ण बासी पानी के साथ खायें। इससे आंतों में मौजूद सब प्रकार के कीडे एकदम नष्ट होकर मल के साथ शीघ्र ही बाहर निकल जाते हैं।

या अजवायन चूर्ण आधा ग्राम में चुटकी भर काला नमक मिलाकर रात्रि के समय रोजाना गर्म जल से देने से बालकों के कीडे नष्ट होते हैं। बडे अजवायन के चुर्ण चार भाग में काला नमक एक भाग मिलाकर दो ग्राम की मात्रा से गर्म पानी के साथ लें।

या अजवायन का चूर्ण आधा ग्राम, साठ ग्राम मट्ठे या छाछ के साथ और बडो को दो ग्राम १२५ ग्राम मट्ठे के साथ देने से पेट के कीडे नष्ट होकर मल के साथ बाहर निकल जाते है।

तनाव दूर करें
( क्योंकि हर बीमारी की जड़ है तनाव )


तनाव के बुरे प्रभावों को हम सभी जान चुके हैं, लेकिन अमेरिकी अनुसंधानकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार मसूड़ों की सड़न से लेकर खांसी और बुखार जैसी बीमारियों के लिए भी यह जिम्मेदार है।

'एसोसिएशन आफ साइकोलाजिकल साइंस' की मासिक पत्रिका 'आबजर्वर' द्वारा प्रकाशित इस अध्ययन में मनोविज्ञान, चिकित्सा विज्ञान, स्नायु विज्ञान और अनुवांशिकी के क्षेत्र में किए गए अध्ययन के अनुसार तनाव लगभग सभी बीमारियों की जड़ है।

अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार तनाव विपरीत परिस्थितियों के अनुसार ढलने की इंसान की क्षमता को प्रभावित करता है। तनाव की परिस्थिति में 'एड्रनलीन' और 'कार्टीजोल' जैसे हारमोन निकलते हैं जिनके चलते धड़कन तेज होने और सांस की गति बढ़ने के अलावा रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है।

अनुसंधानकर्ताओं का मानना है कि तनाव के चलते मस्तिष्क में होने वाले बदलाव पेट व आंतों की गड़बड़ियों सहित मसूड़ों में खराबी, मधुमेह यहां तक की कैंसर का भी कारण बन सकते हैं। साथ ही इसके चलते कैंसर जैसी बीमारी और एचआईवी जैसे वायरसों से लड़ने की क्षमता भी प्रभावित होती है।


आशा करता हूँ की आप सबसे इनसे लाभानावित होंगे ।




शनिवार, २१ फरवरी २००९

फ्री डोमेन नेम

फ्री डोमेन नेम बनाने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें।
फ्री डोमेन नेम/ यू आर एल फोर्वार्डिंग

धन्यवाद

गुरुवार, १२ फरवरी २००९

एक राजस्थानी गीत

उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे

ड़ उड़ रे उड़ उड़ रे

उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे

उड़ उड़ रे म्हारा, काळा रे कागला

कद म्हारा पीव्जी घर आवे

कद म्हारा पीव्जी घर आवे , आवे र आवे

कद म्हारा पिव्जी घर आवे

उड़ उड़ रे म्हारा काळा र कागला

कद माहरा पीव्जी घर आवे

खीर खांड रा जीमण जीमाऊँ

सोना री चौंच मंढाऊ कागा

जद म्हारा पिव्जी घर आवे, आवे रे आवे

उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे

म्हारा काळा र कागला

कद माहरा पीव्जी घर आवे

पगला में थारे बांधू रे घुघरा

गला में हार कराऊँ कागा

जद महारा पिव्जी घर आवे

उड़ उड़ रे

महारा काळा रे कागला

कद महारा पिव्जी घर आवे

उड़ उड़ र महारा काला र कागला

कद महरा पिव्जी घर आवे

जो तू उड़ने सुगन बतावे

जनम जनम गुण गाऊँ कागा

जद मारा पिव्जी घर आवे , आवे र आवे

जद म्हारा पिव्जी घर आवे

उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे

उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे महारा काळा रे कागला

कद म्हारा पिव्जी घर आवे

उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे

उड़ उड़ रे उड़ उड़ रे म्हारा काळा रे कगला

जद म्हारा पिव्जी घर आवे

एक कुमाऊ गीत

बेडु पाको बारो मासा

बेडु पाको बारो मासा, पहाड़ का एक प्रसिद्ध गीत हैहर उत्तरांचली इस गीत के परे में जानता हैआओ आप भी इस गीत को एन्जॉय करो.

बेडु पाको बारो मासा, ओ नरण काफल पाको चैत मेरी छैला
बेडु पाको बारो मासा, ओ नरण काफल पाको चैत मेरी छैला - २

भुण भुण दीन आयो -२ नरण बुझ तेरी मैत मेरी छैला -२
बेडु पाको बारो मासा -२, ओ नरण काफल पाको चैत मेरी छैला - २

आप खांछे पन सुपारी -२, नरण मैं भी लूँ छ बीडी मेरी छैला -२
बेडु पाको बारो मासा -२, ओ नरण काफल पाको चैत मेरी छैला - २

अल्मोडा की नंदा देवी, नरण फुल छदुनी पात मेरी छैला
बेडु पाको बारो मासा -२, ओ नरण काफल पाको चैत मेरी छैला - २

त्यार खुटा मा कांटो बुड्या, नरणा मेरी खुटी पीडा मेरी छैला
बेडु पाको बारो मासा -२, ओ नरण काफल पाको चैत मेरी छैला - २

अल्मोडा को लल्ल बजार, नरणा लल्ल मटा की सीढी मेरी छैला
बेडु पाको बारो मासा -२, ओ नरण काफल पाको चैत मेरी छैला - २


प्रार्थना

मालिक तेरे बंदे हम

(साईं बाबा कहते हैं की सबका मालिक एक हैअतः हमे परमपिता परमेश्वर की

प्रार्थना निम्न प्रकार से करनी चाहिए )

ऐ मालिक तेरे बंदे हम
ऐसे हो हमारे करम
नेकी पर चलें और बदी से टलें
ताकि हंसते हुये निकले दम

जब ज़ुलमों का हो सामना
तब तू ही हमें थामना
वो बुराई करें, हम भलाई भरें
नहीं बदले की हो कामना
बढ़ उठे प्यार का हर कदम
और मिटे बैर का ये भरम
नेकी पर चलें

ये अंधेरा घना छा रहा
तेरा इनसान घबरा रहा
हो रहा बेखबर
कुछ न आता नज़र
सुख का सूरज छिपा जा रहा
है तेरी रोशनी में वो दम
जो अमावस को कर दे पूनम
नेकी पर चलें

बड़ा कमज़ोर है आदमी
अभी लाखों हैं इसमें कमीं
पर तू जो खड़ा, है दयालू बड़ा
तेरी कृपा से धरती थमी
दिया तूने हमें जब जनम
तू ही झेलेगा हम सबके ग़म
नेकी पर चलें

हे मालिक सबकी रक्षा करना

जीवन के रंग

जीवन के रंग

में देखता हूँ
रोटी को तरसते बच्चे
दूध पीते कुत्ते
इलाज की आशा में
लुटता मरीज
धनवान होता डॉक्टर
पैसों के लिए
जमीर बेचती औरत
दरिंदा बना आदमी
सरकारी दफ्तर में
रोता गरीब
दादागिरी करता अफसर
में सोचता हूँ
जीवन के रंग
कितने अजीब


बुधवार, ११ फरवरी २००९

महत्वपूर्ण वेबसाइट्स

अधिक जानकारी के लिए क्लिक करिए

1. मुतुअल फंड के रेट जानिए

2. इंग्लिश के मध्यम से हिन्दी लिखें

3. Mutual Fund ki K.Y.C. के लिए हेल्प

4. दुनिया की करेंसी के रेट जानिए

5. हिन्दी वेबसाइट्स

6. रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की वेब साईट

7. पे टेलीफोन बिल ऑनलाइन

8. ध्यान सीखो

9. रेलवे टिकेट बुक कराएँ

10. जीमेल में अकाउंट बनाये

11. हिन्दी वेबदुनिया में अकाउंट बनाए

12. याहू / वाई मेल / रॉकेट मेल में अकाउंट बनाए


कवितायें

नेता जी की जीत

जीत के बाद नेता जी
नेता के मन मैं
आ जाती है खोंट
जब उसे मिल जाते है वोट
जीत के बाद
जनता के मतदान से
देश के नव निर्माण के नाम पर
फिर जनता को जम कर लूटते है ।


दहेज

दहेज के अभाव में
गरीब की बछिया
कसाई को
सोप दी जाती है ।


नेताओं की चाल

जब तक हिन्दू मुस्लिम
आपस मे लड़ते रहेंगे
तब तक नेताओं से
लुट्ते रहेंगे


नेता जी की जीत का जश्न

नेताजी की जीत की खुशी
राज्य में भयंकर सूखा पडा था
खेत नदी बावडी सब सुख गये थे
पीने का पानी खत्म हो गया था
निरीक्शण पर आये
नेताजी आगमन पर
जम के शराब परोसी गयी
रात भर सब मदहोश थे
अगले दिन अखबारों में
मोटे मोटे अक्शरों में खबर छपी थी
कि पानी की कमी से 18
दारू पीने से 150

जीके इंडियन

शुक्रवार, ६ फरवरी २००९

गायत्री शाप विमोचनम्

श्री गायत्री शाप विमोचनम्

शाप मुक्ता हि गायत्री चतुर्वर्ग फल प्रदा। अशाप मुक्ता गायत्री चतुर्वर्ग फलान्तका॥

ॐ अस्य श्री गायत्री। ब्रह्मशाप विमोचन मन्त्रस्य। ब्रह्मा ऋषिः। गायत्री छन्दः।

भुक्ति मुक्तिप्रदा ब्रह्मशाप विमोचनी गायत्री शक्तिः देवता। ब्रह्म शाप विमोचनार्थे जपे
विनियोगः॥

ॐ गायत्री ब्रह्मेत्युपासीत यद्रूपं ब्रह्मविदो विदुः। तां पश्यन्ति धीराः सुमनसां वाचग्रतः।

ॐ वेदान्त नाथाय विद्महे हिरण्यगर्भाय धीमही। तन्नो ब्रह्म प्रचोदयात्।

ॐ गायत्री त्वं ब्रह्म शापत् विमुक्ता भव॥

ॐ अस्य श्री वसिष्ट शाप विमोचन मन्त्रस्य निग्रह अनुग्रह कर्ता वसिष्ट ऋषि। विश्वोद्भव
गायत्री छन्दः।

वसिष्ट अनुग्रहिता गायत्री शक्तिः देवता। वसिष्ट शाप विमोचनार्थे जपे विनियोगः॥

ॐ सोहं अर्कमयं ज्योतिरहं शिव आत्म ज्योतिरहं शुक्रः सर्व ज्योतिरसः अस्म्यहं। (इति युक्त्व
योनि मुद्रां प्रदर्श्य गायत्री त्रयं पदित्व )।

ॐ देवी गायत्री त्वं वसिष्ट शापत् विमुक्तो भव॥

ॐ अस्य श्री विश्वामित्र शाप विमोचन मन्त्रस्य नूतन सृष्टि कर्ता विश्वामित्र ऋषि।
वाग्देहा गायत्री छन्दः।

विश्वामित्र अनुग्रहिता गायत्री शक्तिः देवता। विश्वामित्र शाप विमोचनार्थे जपे
विनियोगः॥

ॐ गायत्री भजांयग्नि मुखीं विश्वगर्भां यदुद्भवाः देवाश्चक्रिरे विश्वसृष्टिं तां कल्याणीं
इष्टकरीं प्रपद्ये।

यन्मुखान्निसृतो अखिलवेद गर्भः। शाप युक्ता तु गायत्री सफला न कदाचन।

शापत् उत्तरीत सा तु मुक्ति भुक्ति फल प्रदा॥ प्रार्थना॥ ब्रह्मरूपिणी गायत्री दिव्ये
सन्ध्ये सरस्वती।

अजरे अमरे चैव ब्रह्मयोने नमोऽस्तुते। ब्रह्म शापत् विमुक्ता भव। वसिष्ट शापत् विमुक्ता भव।
विश्वामित्र शापत् विमुक्ता भव॥


बुधवार, ४ फरवरी २००९

पर्वत

अरावली पहाडी
कोटा जयपुर मार्ग

मन्दिर पालम विहार

कुछ तुम कहो

हे सखी
कुछ तुम कहो
कुछ हम कहें
हंस बोलकर
समय व्यतीत करें


जिंदगी का सफर

चम्बल नदी

सुबह

सुबह का सूरज
आशाओं का पैगाम
जिंदगी बस
सूरज की तरह
हमेशा दमकती रहे


रावतभाटा

राजस्थानी मांडना - रंगोली

सजादो आज
घर आँगन
प्रभु आनेवाले हैं


आमेर का किला


































यह
आमेर ( जयपुर ) का किला है। जयपुर से पहले कछवाहा वंस की राजधानी आमेर ही थी . राजा मानसिंह जी ने साल १५९२ में इसका निर्माण शुरू किया था। आमेर कला का एक सुंदर नमूना है। यहाँ पर बहुत सी फिल्मों की शूटिंग होती है। ।

जयपुर देखने वालों को आमेर जरुर देखना चहिये। आमेर से आप पुरे जयपुर का नजारा भी देख सकते हैं।

जीके इंडियन

मंगलवार, ३ फरवरी २००९

साईं बाबा आरती

आरती उतारे हम तुम्हारी साईँ बाबा ।
चरणों के तेरे हम पुजारी साईँ बाबा ॥

विद्या बल बुद्धि, बन्धु माता पिता हो
तन मन धन प्राण, तुम ही सखा हो
हे जगदाता अवतारे, साईँ बाबा ।
आरती उतारे हम तुम्हारी साईँ बाबा ॥

ब्रह्म के सगुण अवतार तुम स्वामी
ज्ञानी दयावान प्रभु अंतरयामी
सुन लो विनती हमारी साईँ बाबा ।
आरती उतारे हम तुम्हारी साईँ बाबा ॥

आदि हो अनंत त्रिगुणात्मक मूर्ति
सिंधु करुणा के हो उद्धारक मूर्ति
शिरडी के संत चमत्कारी साईँ बाबा ।
आरती उतारे हम तुम्हारी साईँ बाबा ॥

भक्तों की खातिर, जनम लिये तुम
प्रेम ज्ञान सत्य स्नेह, मरम दिये तुम
दुखिया जनों के हितकारी साईँ बाबा ।
आरती उतारे हम तुम्हारी साईँ बाबा ॥

साईं वंदना

ॐ नमो भगवते साईनाथाय नमो नमः
(बाबा के भक्तों के लिए बचन )

१. जो शिरडी में आएगा,आपद दूर भगायेगा

२.बड़े समाधि की सीडी पर, पाव तले दुःख की पीडी पर

३.त्याग शरीर चला जाऊँगा ,भक्त हेतु भागा आऊँगा

४.मन मे रखना पूरण विश्वास ,करे समाधि पूरी आस

५.मुझे सदा जीवित ही जानो ,अनुभव करो सत्य पहचानो

६. मेरी शरण आ खाली जाये,होतो कोई मुझे बताये

७.जैसा भाव रहा जिस जन का,वैसा रूप रहा मेरे मन का

८.भार तुम्हारा मुझ पर होगा,वचन न मेरा झूठा होगा

९.आ सहायता ले भरपूर ,जो माँगा वह नही है दूर

१०.मुझमें लीन वचन मन काया, उसका ऋण न कभी चुकाया

११.धन्य-धन्य वे भक्त अनन्य ,मेरी शरण तज जिसे न अन्य

| ॐ साईं नमः : | बाबा कहते हैं की सबका मालिक एक है |


साईं नाम जप - १०८ बार जप

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः

ॐ नमो भगवते साई नाथाये नमो नमः


साईं स्मरण

ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई

ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई

ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई

ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई
ॐ साई

साईं से प्राथना - दया करना बाबा

साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
साईं रहम नजर करना,बच्चों का पालन करना।
| ॐ श्री साईं नमो नमः |

शनि भगवन की चालीसा

।। दोहा ।।

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।

दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ।।

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।

करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ।।


जयति जयति शनिदेव दयाला । करत सदा भक्तन प्रतिपाला ।।

चारि भुजा, तनु श्याम विराजै । माथे रतन मुकुट छवि छाजै ।।

परम विशाल मनोहर भाला । टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला ।।

कुण्डल श्रवण चमाचम चमके । हिये माल मुक्तन मणि दमके ।।

कर में गदा त्रिशूल कुठारा । पल बिच करैं आरिहिं संहारा ।।

पिंगल, कृष्णों, छाया, नन्दन । यम, कोणस्थ, रौद्र, दुख भंजन ।।

सौरी, मन्द, शनि, दश नामा । भानु पुत्र पूजहिं सब कामा ।।

जा पर प्रभु प्रसन्न है जाहीं । रंकहुं राव करैंक्षण माहीं ।।

पर्वतहू तृण होई निहारत । तृण हू को पर्वत करि डारत ।।

राज मिलत बन रामहिं दीन्हो । कैकेइहुं की मति हरि लीन्हों ।।

बनहूं में मृग कपट दिखाई । मातु जानकी गई चतुराई ।।

लखनहिं शक्ति विकल करि डारा । मचिगा दल में हाहाकारा ।।

रावण की गति-मति बौराई । रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई ।।

दियो कीट करि कंचन लंका । बजि बजरंग बीर की डंका ।।

नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा । चित्र मयूर निगलि गै हारा ।।

हार नौलाखा लाग्यो चोरी । हाथ पैर डरवायो तोरी ।।

भारी दशा निकृष्ट दिखायो । तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो ।।

विनय राग दीपक महं कीन्हों । तब प्रसन्न प्रभु है सुख दीन्हों ।।

हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी । आपहुं भरे डोम घर पानी ।।

तैसे नल परदशा सिरानी । भूंजी-मीन कूद गई पानी ।।

श्री शंकरहि गहयो जब जाई । पार्वती को सती कराई ।।

तनिक विलोकत ही करि रीसा । नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा ।।

पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी । बची द्रौपदी होति उघारी ।।

कौरव के भी गति मति मारयो । युद्घ महाभारत करि डारयो ।।

रवि कहं मुख महं धरि तत्काला । लेकर कूदि परयो पाताला ।।

शेष देव-लखि विनती लाई । रवि को मुख ते दियो छुड़ई ।।

वाहन प्रभु के सात सुजाना । जग दिग्ज गर्दभ मृग स्वाना ।।

जम्बुक सिंह आदि नखधारी । सो फल जज्योतिष कहत पुकारी ।।

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं । हय ते सुख सम्पत्ति उपजावैं ।।

गर्दभ हानि करै बहु काजा । गर्दभ सिद्घ कर राज समाजा ।।

जम्बुक बुद्घि नष्ट कर डारै । मृग दे कष्ट प्रण संहारै ।।

जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी । चोरी आदि होय डर भारी ।।

तैसहि चारि चरण यह नामा । स्वर्ण लौह चांजी अरु तामा ।।

लौह चरण पर जब प्रभु आवैं । धन जन सम्पत्ति नष्ट करावै ।।

समता ताम्र रजत शुभकारी । स्वर्ण सर्व सुख मंगल कारी ।।

जो यह शनि चरित्र नित गावै । कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै ।।

अदभुत नाथ दिखावैं लीला । करैं शत्रु के नशि बलि ढीला ।।

जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई । विधिवत शनि ग्रह शांति कराई ।।

पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत । दीप दान दै बहु सुख पावत ।।

कहत रामसुन्दर प्रभु दासा । शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा ।।




।। दोहा ।।

पाठ शनिश्चर देव को, की हों विमल तैयार ।

करत पाठ चालीस दिन, हो भवसागर पार ।।

गायत्री साधना और उपासना

गायत्री उपासना कभी भी, किसी भी स्थिति में की जा सकती है । हर स्थिति में यह लाभदायी है, परन्तु विधिपूर्वक भावना से जुड़े न्यूनतम कर्मकांडों के साथ की गई उपासना अति फलदायी मानी गई है । तीन माला नायत्री मंत्र का जप आवश्यक माना गया है । शौच-स्नान से निवृत होकर नियत स्थान, नियत समय पर सुखासन में बैठकर नित्य गायत्री उपासना की जानी चाहियें ।


उपासना का विधि विधान इस प्रकार है –


1. ब्रहम संध्या – जो शरीर व मन को पवित्र बनाने के लिये की जाती है । इसके अन्तर्गत पाँच कृत्य करने पड़ते है ।

अ. पवित्रीकरण – बाँए हाथ में जल लेकर उसे दाहिने हाथ से ढक लिया जाए । पवित्रीकरण का मंत्रोच्चारण किया जाए । तदुपरांत उस ज को सिर तथा शरीर पर छिड़क लिया जाये ।


ऊँ अपवित्रः पवित्रोवा, सर्वावस्थां गतोडपि वा ।

यः स्मरेत्पुणडरीकाक्षं, स बाहृाभ्यन्तरः शुचिः ।।

ऊँ पुनातु पुण्डरीकाक्षः, पुनातु पुण्डरीकाक्षः, पुनातु ।



आचमन – वाणी, मन व अन्तःकरण की शुद्घि के लिये चम्मच से तीन बार जल का आचमन करें । हर मंत्र के साथ एक आचमन किया जाये ।


ऊँ अमृतोपस्तरणमसि स्वाहा ।। 1 ।।

ऊँ अमृतापिधानमसि स्वाहा ।। 2 ।।

ऊँ सत्यं यशः श्रीर्मयि, श्रीः श्रयतां स्वाहा ।। 3 ।।



स. शिखा स्पर्श एवं विंदन – शिखा के स्थान को भीगी पाँचों अंगुलियों से स्पर्श करते हुए भावना करें कि गायत्री के इस प्रतीक के माध्यम से सदा सदविचार ही यहाँ स्थापित रहेंगे । निम्न मंत्र का उच्चारण करें ।


ऊँ चिदरुपिणि महामाये, दिव्यतेजः समन्विते ।

तिष्ठ देवि शिखामध्ये, तेजोवृद्घि कुरुष्व मे ।।



द. प्रणायाम – श्वास को धीमी गति से बाहर से गहरी खींचकर रोकना व बाहर निकालना प्राणायाम के कृत्य में आता है । श्वांस खींचने के साथ भावना करें कि प्राणशक्ति की श्रेष्ठता श्वांस के द्घारा अंदर खींची जा रही है, छोड़ते समय यह भावना करें कि हमारे दुर्गुण, दुष्प्रवृत्तियाँ, बुरे विचार प्रश्वांस के साथ बाहर निकल रहे है । प्राणायाम, मंत्र के उच्चारण के बाद किया जाये ।


ऊँ भूः ऊँ भुवः ऊँ स्वः ऊँ महः ऊँ जनः ऊँ तपः ऊँ सत्यम् । ऊँ भूर्भवः स्वः त्तसवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् । ऊँ आपोज्योतीरसोडमृतं, ब्रहम भूर्भऊवः स्वः ऊँ ।


य. न्यास – इसका प्रयोजन है – शरीर के सभी महत्तवपूर्ण अंगों में पवित्रता का समावेश तथा अंतः की चेतना को जगाना ताकि देवपूजन जैसा श्रेष्ठ कृत्य किया जा सके । बाँयें हाथ की हथेली में जल लेकर दाहिने हाथ की पाँचों अंगुलियों को उसमें भिगोकर बताए गये स्थान को मंत्रोच्चार के साथ स्पर्श करें ।


ऊँ वाड.मे आस्येडस्तु । (मुख को)

ऊँ नसोर्मेप्राणोडस्तु । (नासिका के दोनो छिद्रों को)

ऊँ अक्ष्णोर्मेचक्षुरस्तु । (दोनों नेत्रों को)

ऊँ कर्णयोर्मे श्रोत्रमस्तु । (दोनों कानों को)

ऊँ बाहृोर्मे बलमस्तु । (दोनों भुजाओं को)

ऊँ ऊर्वोर्मे ओजोडस्तु । (दोनों जंघाओं को)

ऊँ अरिष्टानि मेड़्रानि, तनूस्तन्वा में सह सन्तु (समस्त शरीर को)


आत्मशोधन की ब्रहम संध्या के उपरोक्त पाँचों कृत्यों का भाव यह है कि साधक में पवित्रता एवं प्रखरता की अभिवृद्घि होतथा मलिनाता-अवांछनीयता की निवृत्ति हो । पवित्र प्रखर व्यक्ति ही भगतवान के दरबार में प्रवेश के अधिकारी होते है ।

2. देवपूजन – क. – गायत्री उपासना का आधार केन्द्र महाप्रज्ञा-ऋतंभरा गायत्री है । उनका प्रतीक चित्र सुसज्जित पूजा की वेदी पर स्थापित कर उनका निम्न मंत्र के माध्यम से आवाहन करें । भावना करें कि साधक की भावना के अनुरुप माँ गायत्री की शक्ति वहाँ अवतरित हो, स्थापिर हो रही है ।

ऊँ आयातु वरदे देवि । त्र्यक्षरे ब्रहमवादिनि ।

गायत्रिच्छन्दसां मातः, ब्रहृयोने नमोडस्तु ते ।। 3 ।।

श्री गायत्र्यै नमः । आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि ।

ततो नमस्कारं करोमि ।


ख. गुरु परमात्मा की दिव्य चेतना का अंश है, जो साधक का मार्गदर्शन करता है । सदगुरु के रुप में पूज्य गुरुदेव एवं वंदनीया माताजी का अभिनन्दन करते हुए उपासना की सफलता हेतु प्रार्थना के साथ गुरु आवाहन् निम्न मंत्रोच्चर के साथ करें ।


ऊँ गुरुब्रर्हमा गुरुविष्णुः, गुरुरेव महेश्वरः ।

गुरुरेव परब्रहृ, तस्मै श्री गुरवे नमः ।। 1 ।।

अखन्डमणडलाकारं, व्याप्तं येन चराचरम् ।

तत्पदं दर्शितं येन, तस्मै श्री गुरवे नमः ।। 2 ।।

मातृवत् लालयित्री च, पितृवत् मार्गदर्शिका ।

नमोडस्तु गुरु सत्तायै, श्रद्घा-प्रज्ञायुता च या ।। 3 ।।

ऊँ श्री गुपवे नमः । आवाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि,

धयायामि ।


ग. माँ गायत्री व गुरुसत्ता के आवाहन व नमन के पश्चात् देवपूजन में घनिष्ठता स्थापना हेतु पंचोपचार पूजन किया जाता है । इन्हें विधिवत् संपन्न करें । जल, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप तथा नैवेघ प्रतीक के रुप में आराध्य के समक्ष प्रस्तुत किये जाते है । एक-एक करके छोटी तश्तरी में इन पांचों को समर्पित करते चलें । जल का अर्थ है – नम्रता, सहृदयता । अंक्षत का अर्थ है – समयदान, अंशदान । पुष्प का अर्थ है – प्रसन्नता, आंतरिक उल्लास । धूप-दीप का अर्थ है – सुगंध व प्रकाश का वितरण, पुण्य परमार्थ तथा नैवेघ का अर्थ है – स्वभाव व व्यवहार में मधुरता, शालीनता का समावेश ।


ये पांचों उपचार व्यक्तित्व को सत्प्रवृत्तियों से संपन्न करने के लिये किये जाते है । कर्मकांड के पीछे भावना महत्वपूर्ण है ।


3. जप – गायत्री मंत्र का जप न्यूनतम तीन माला अर्थात् घड़ी से प्रायः पन्द्रह मिनट नियमित रुप से किया जाये, अधिक बन पड़े तो अधिक उत्तम । होंठ हिलते रहे, किंतु आवाज इतनी मंद हो कि पास बैठे व्यक्ति भी सुन न सकें । जप प्रकि्या कषाय-कल्मषों-कसंस्कारों को धोने के लिये की जाती है ।


ऊँ भूर्भवः स्वः त्तसवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।


इस प्रकार मंत्र का उच्चारण करते हुए भावना की जाए कि हम निरंतर पवित्र हो रहे है । दुर्वुद्घि की जगह सदबुद्घि की स्थापना हो रही है ।

4. ध्यान - जप तो अंग अवयव करते है, मन को ध्यान में नियोजित करना होता है । साकार ध्यान में गायत्री माता के आँचल की छाया में बैठने तथा उनका दुलार भरा प्यार अनवरत रुप से प्राप्त होने की भावना की जाती है । निराकार ध्यान में गायत्री के देवता सविता की प्रभातकालीन स्वर्णिम किरणों के शरीर पर बरसने व शरीर में श्रद्घा-प्रज्ञा निष्ठा रुपी अनुदान उतरने की मान्यता परपक्व की जाती है । जप और ध्यान के समन्वय से ही चित्त एकाग्र होता है और आत्मसत्ता पर उस कृत्य का महत्वपूर्ण प्रभाव भी पड़ता है ।


5. सूर्याध्र्यदान – जप समाप्ति कके पश्चात् पूजा वेदी पर रखे छोटे कलश का जल सूर्य की दिशा में अर्घ्य रुप में निम्न मंत्र के उच्चारण के साथ चढ़ाया जाता है ।


ऊँ सूर्यदेव । सहस्त्रांशो, तेजोराशे जगत्पते ।

अनुकम्पय मां भक्तया, गृहाणार्घ्य दिवाकर ।।

ऊँ सूर्याय नमः, आदित्याय नमः, भास्कराय नमः ।।


भावना यह करें कि जल आत्मसत्ता का प्रतीक है एवं सूर्य विराट ब्रहृ का तथा हमारी सत्ता-संपदा समष्टि के लिये समर्पित विर्सजित हो रही है ।


नमस्कार एवं विसर्जन – इतना सब करने के बाद पूजा स्थल पर विदाई के लिये करबद्घ नतमस्तक हो नमस्कार किया जाए व सब वस्तुओं को समेटकर यथास्थान रख लिया जाये । जप के लिये माला तुलसी या चंदन की ही लेनी चाहिये । सूर्योदय के दो घंटे पूर्व से सूर्यास्त के एक घंटे बाद तक कभी भी गायत्री उपासना की जा सकती है । मौन मानसिक जप चौबीस घंटे कभी किया जा सकता है । माला जपते समय तर्जनी उंगली का उपयोग न करें तथा सुमेरु का उल्लंघन न करें ।

|| ॐ श्री गयत्रैय नमः ||

गायत्री स्तवन

मूल संस्कृत में

ऊँ यन्मंडलं दीप्तिकरं विशालम्, रत्नप्रभं तीव्रमनादिरुपम् ।

दारिद्रय – दुःखक्षय कारणं च, पुनातु मां तत्सवितुवर्रेण्यम् ।। 1 ।।

यन्मण्डलं देवगणैः सुपूजितम्, विप्रैः स्तुतं मानवमुक्तिकोविदम् ।

तं देवदेवं प्रणमामि भर्गं, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।। 2 ।।

यन्मण्डलं ज्ञानघनं त्वगम्यं, त्रैलोक्य पूज्यं त्रिगुणात्मरुपम् ।

समस्त तेजोमय दिव्यरुपं, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।। 3 ।।

यन्मण्डलं गूढमति प्रबोधं, धर्मस्य वृद्घिं कुरुते जनानाम् ।

यत् सर्वपापक्षयकारणं च, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।। 4 ।।

यन्मण्डलं व्याधि विनाशदक्षम्, यद्घग् यजुः सासमु सम्प्रगीतम् ।

प्रकाशितं येन च भूर्भुवः स्वः, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।। 5 ।।

यन्मण्डलं वेदविदो वदन्ति, गायन्ति यच्चारण सिद्घसंघाः ।

यघोगिनो योगजुषां च संघाः, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।। 6 ।।

यन्मण्डलं सर्वजनेषु पूजितं, ज्योतिश्च कुर्यादिह मर्त्यलोके ।

यत्काल कालादिमनादिरुपम, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।। 7 ।।

यन्मण्डलं विष्णुचतुर्मुखास्यं, यदक्षरं पापहरं जनानाम् ।

यत्कालकल्पक्षयकारणं च, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।। 8 ।।

यन्मण्डलं विश्वसृजां प्रसिद्घं, उत्पत्ति रक्षा प्रलयप्रगल्भम् ।

यस्मिन्जगत् संहरतेडखिलं च, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।। 9 ।।

यन्मण्जलं सर्वगतस्य विष्णोंः, आत्मा परंधाम विशुद्घतत्वम् ।

सूक्ष्मान्तरैर्योगपथानुगम्यं पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।। 10 ।।

यन्मण्डलं ब्रहृविदो वदन्ति, गायन्ति यच्चारण सिद्घसंघाः ।

यन्मण्डलं वेदविदः स्मरन्ति, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।। 11 ।।

यन्मण्डलं वेद विदोपगीतं, यघोगिनां योग पथानुगम्यम् ।

तत्सर्ववेदं प्रणमामि दिव्यं, पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।। 12 ।।

अनुवाद हिन्दी में

शुभ ज्योति के पुंज, अनादि अनुपम, ब्रहमाण्ड व्यापी आलोक कर्ता ।


दारिद्रय दुःख भय से मुक्त कर दो पावन बना दो हे देव सविता ।। 1 ।।

ऋषि देवताओं से नित्य पूजित, हे भर्ग भव बन्धन मुक्ति कर्ता ।।

स्वीकार करलो वंदन हमारा, पावन बना दो हे देव सविता ।। 2 ।।

हे ज्ञान के घन त्रैलोक्य पूजित, पावन गुणों के विस्तार कर्ता ।

समस्त प्रतिभा के आदि कारण, पावन बना दो हे देव सविता ।। 3 ।।

हे गूढ़ अंतःकरण में विराजित, तुम दोष-पापादि संहार कर्ता ।

शुभ धर्म का बोध हमको करा दो, पावन बना दो हे देव सविता ।। 4 ।।

हे व्याधि नाशक हे पुष्टि दाता, ऋग्, साम, यजु वेद संचार कर्ता ।

हे भूर्भुवः स्वः में स्व प्रकाशित, पावन बना दो हे देव सविता ।। 5 ।।

सब वेद विद, चारण, सिद्घ योगी, जिसके सदा से है गान कर्ता ।

हे सिद्घ संतों के लक्ष्य शाश्वत, पावन बना दो हे देव सविता ।। 6 ।।

हे विश्व मानव से आदि पूजित, नश्वर जगत् मेंशुभ ज्योति कर्ता ।

हे काल के काल-अनादि ईश्वर, पावन बना दो हे देव सविता ।। 7 ।।

हे विष्णु, ब्रहादि द्घारा प्रचारित, हे भक् पालक, हे पाप हर्ता ।

हे काल-कल्पादि के आदि स्वामी, पावन बना दो हे देव सविता ।। 8 ।।

हे विश्व मंडल के आदि कारण, उत्पत्ति-पालन-संहार कर्ता ।

होता तुम्ही में लय यह जगत् सब, पावन बना दो हे देव सविता ।। 9 ।।

हे सर्वव्यापी, प्रेरक नियन्ता, विशुद्घ आत्मा कल्याण कर्ता ।

शुभ योग पथ पर हम को चलाओ, पावन बना दो हे देव सविता ।। 10 ।।

हे ब्रहृनिष्ठों से आदि पूजित, वेदज्ञ जिसके गुणगान कर्ता ।

सदभावना हम सब में जगा दो, पावन बना दो हे देव सविता ।। 11 ।।

हे योगियों के शुभ मार्गदर्शक, सदज्ञान के आदि संचार कर्ता ।

प्राणिपात स्वीकार लो हम सभी का, पावन